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पितृ पक्ष 2026 — श्राद्ध की सही तिथियाँ, तर्पण विधि, पितृ दोष के रत्न और उपाय

Gemshub Team 29 Jun 2026 1 views 1 min read
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पितृ पक्ष 2026 — श्राद्ध की सही तिथियाँ, तर्पण विधि, पितृ दोष के रत्न और उपाय | Gemshub International

मेरे एक परिचित हैं — अच्छे-भले engineer, दिल्ली में नौकरी, घर-परिवार सब ठीक। लेकिन एक problem थी जो वो खुद समझ नहीं पा रहे थे।

बोले — "यार, जब भी कोई नया काम शुरू करता हूँ — शुरुआत में सब अच्छा लगता है, फिर अचानक सब बिखर जाता है। Marriage भी देर से हुई, बच्चा होने में 4 साल लगे, हर नए project में कोई न कोई अड़चन। क्या है यह?"

कुंडली देखी। पितृ दोष था। और पूछा तो पता चला — उनके दादाजी का श्राद्ध कभी नहीं हुआ। परिवार में किसी ने ध्यान नहीं दिया।

"पितृ पक्ष में श्राद्ध करो," हमने कहा। "और गोमेद पहनो।"

उस साल पितृ पक्ष में उन्होंने पहली बार श्राद्ध किया। पूरी विधि से। अगले 8 महीने में job promotion मिली। और बच्चे के admission में जो अड़चन थी — वो भी खत्म हो गई।

यह coincidence था? शायद। लेकिन ऐसे अनुभव हज़ारों परिवारों के हैं।

आज इस लेख में समझेंगे — पितृ पक्ष 2026 की सही तिथियाँ, श्राद्ध कैसे करें, पितृ दोष के लक्षण क्या हैं, और कौन से रत्न और उपाय इसमें काम करते हैं।


पितृ पक्ष क्या है — असली मतलब समझो

पितृ पक्ष — यानी पितरों का पखवाड़ा। पितर मतलब हमारे पूर्वज — माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, और उनसे भी पहले जो चले गए।

हिंदू धर्म में माना गया है कि हर इंसान तीन ऋणों के साथ पैदा होता है — देव ऋण, ऋषि ऋण, और पितृ ऋण। पितृ ऋण वह है जो हम अपने पूर्वजों के कारण जीवित हैं — उनकी मेहनत, उनका बलिदान, उनके कारण यह शरीर और जीवन मिला।

पितृ पक्ष वह समय है जब हम यह ऋण चुकाते हैं — श्रद्धा और तर्पण के माध्यम से।

शास्त्रों में लिखा है — "श्रद्धया इदं दीयते इति श्राद्धम्" — जो श्रद्धा से दिया जाए, वही श्राद्ध है।

और मार्कण्डेय पुराण कहता है — "श्राद्ध से पितृगण आयु, संतान, धन, विद्या, सुख और मोक्ष देते हैं।"

क्यों ये 16 दिन: हमारे पूर्वजों की 16 तिथियाँ होती हैं — प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक। इसीलिए पितृ पक्ष 16 दिन का होता है।

पितृ पक्ष 2026 — पूरा calendar

2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर (शनिवार) से शुरू होकर 10 अक्टूबर (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होगा।

तिथि दिन श्राद्ध किनका
26 सितंबरशनिवारपूर्णिमा श्राद्धपूर्णिमा को निधन
27 सितंबररविवारप्रतिपदा श्राद्धप्रतिपदा को निधन
28 सितंबरसोमवारद्वितीया श्राद्धद्वितीया को निधन
29 सितंबरमंगलवारतृतीया + महा भरणीतृतीया को निधन
30 सितंबरबुधवारचतुर्थी + पंचमीचतुर्थी-पंचमी को निधन
1 अक्टूबरबृहस्पतिवारषष्ठी श्राद्धषष्ठी को निधन
2 अक्टूबरशुक्रवारसप्तमी श्राद्धसप्तमी को निधन
3 अक्टूबरशनिवारअष्टमी श्राद्धअष्टमी को निधन
4 अक्टूबररविवारनवमी श्राद्धनवमी को निधन (माँ के लिए विशेष)
5 अक्टूबरसोमवारदशमी श्राद्धदशमी को निधन
6 अक्टूबरमंगलवारएकादशी श्राद्धएकादशी को निधन (सन्यासियों के लिए)
7 अक्टूबरबुधवारद्वादशी + मघाद्वादशी को निधन
8 अक्टूबरबृहस्पतिवारत्रयोदशी श्राद्धत्रयोदशी को निधन (बच्चों के लिए)
9 अक्टूबरशुक्रवारचतुर्दशी श्राद्धअकाल मृत्यु — दुर्घटना, आत्महत्या
10 अक्टूबरशनिवारसर्वपितृ अमावस्या ⭐सभी पितरों के लिए — तिथि न पता हो तो
✅ अगर पितर की तिथि नहीं पता: 10 अक्टूबर 2026 — सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करो। शास्त्रों में यह सभी पितरों का सबसे प्रभावशाली दिन माना गया है।

नवमी श्राद्ध — माँ के लिए

4 अक्टूबर 2026 को नवमी श्राद्ध है। इसे "मातृ नवमी" भी कहते हैं।

यह विशेष रूप से माँ के लिए होता है — चाहे माँ का निधन किसी भी तिथि को हुआ हो। जिनकी माँ नहीं रहीं — वो इस दिन विशेष रूप से माँ का तर्पण करें।

यह बहुत कम लोग जानते हैं — और इसीलिए बहुत लोग इस दिन को miss कर देते हैं।


श्राद्ध कब और कैसे करें — सरल विधि

बहुत लोग सोचते हैं कि श्राद्ध सिर्फ पंडित से करवाया जाता है। लेकिन शास्त्रों में घर पर तर्पण करने की भी पूरी विधि है।

श्राद्ध का सही समय

कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:36 से 12:24 बजे — सबसे शुभ। यही समय पितरों को सबसे जल्दी मिलता है।

रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:24 से 1:12 — अच्छा।

अपराह्न काल: 1:12 से 3:36 — चलता है।

सुबह या रात को श्राद्ध न करें।

तर्पण की सरल विधि

Step 1 — स्नान: सुबह स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें। सफेद या पीला।

Step 2 — दिशा: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। दक्षिण यम की दिशा है — पितरों की दिशा।

Step 3 — जल और तिल: एक तांबे के लोटे में पानी लें। उसमें काले तिल, कुशा (दर्भ) घास, और फूल मिलाएं।

Step 4 — संकल्प: हाथ में जल लेकर बोलें — पितरों का नाम, गोत्र, और तर्पण का संकल्प।

Step 5 — तर्पण: अंगूठे और तर्जनी के बीच से जल बहाएं (यह पितृ तीर्थ है)। बोलें — "अमुक गोत्र अमुक शर्मा/देवी तृप्यन्ताम्" (वे तृप्त हों)।

Step 6 — तीन बार: तीन पीढ़ियों के लिए — पिता, दादा, परदादा (या माँ, नानी, परनानी)।

Step 7 — कौवे को भोग: श्राद्ध का एक हिस्सा कौवे के लिए — यम का दूत। गाय के लिए, कुत्ते के लिए।

Step 8 — ब्राह्मण भोज: अगर संभव हो — किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं।

अगर पूरी विधि नहीं कर सकते: कम से कम इतना करो — काले तिल मिले पानी से दक्षिण दिशा में पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण दो। कौवे को रोटी खिलाओ। यह भी बहुत है।

श्राद्ध में क्या बनाएं — भोजन और प्रसाद

श्राद्ध का भोजन सात्विक होना चाहिए। शास्त्रों में कुछ विशेष चीज़ें बताई गई हैं:

शुभ: खीर (दूध-चावल), दही, घी, तिल से बने व्यंजन, जौ, काले उड़द, कद्दू (सीताफल), आम, केला।

वर्जित: माँस, प्याज, लहसुन, मसूर की दाल, लाल रंग की सब्ज़ियाँ, बासी खाना।

श्राद्ध के दिन घर का माहौल शांत रखें। Quarrel से बचें। TV, loud music बंद।


पितृ दोष — क्या है और कैसे पहचानें

पितृ दोष तब बनता है जब:

पूर्वजों का श्राद्ध नहीं हुआ। पूर्वजों के साथ किसी ने अन्याय किया। परिवार में किसी की अकाल मृत्यु हुई और उनकी आत्मा तृप्त नहीं। कुंडली में सूर्य या चंद्रमा पर राहु या केतु की युति या दृष्टि।

पितृ दोष के लक्षण

इनमें से 3 या अधिक लक्षण हों — तो कुंडली देखवाओ:

हर काम शुरुआत में अच्छा लगता है, बाद में बिखर जाता है। संतान में देरी या संतान को बार-बार बीमारी। विवाह में बार-बार रुकावट। घर में बार-बार क्लेश — बिना कारण के। Financial prosperity नहीं रुकती — आती है और चली जाती है। सपनों में पूर्वज आते हैं — कभी-कभी परेशान या दुखी रूप में। Family में एक के बाद एक बीमारियाँ। नई पीढ़ी में पढ़ाई में रुकावट।


पितृ दोष में रत्न — गोमेद और 9 मुखी रुद्राक्ष

पितृ दोष में राहु का रत्न गोमेद (Hessonite Garnet) सबसे ज़्यादा recommend होता है।

कारण — पितृ दोष में राहु की position अक्सर problematic होती है। कुंडली में जब सूर्य-राहु या चंद्र-राहु की युति हो — पितृ दोष बनता है। गोमेद राहु की energy को balance करता है।

लेकिन बिना कुंडली देखे गोमेद मत पहनो। अगर कुंडली में राहु शुभ भाव में है — तभी गोमेद।

प्रमाणित गोमेद रत्न देखें →

9 मुखी रुद्राक्ष — पितृ दोष का safe उपाय

9 मुखी रुद्राक्ष केतु का रुद्राक्ष है — और यह पितृ दोष में बहुत प्रभावशाली माना जाता है। गोमेद या लहसुनिया की तरह इसमें कोई जोखिम नहीं — यह सभी के लिए safe है।

पितृ पक्ष के दौरान 9 मुखी रुद्राक्ष पहनने से पितरों की ऊर्जा positive होती है।

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1 मुखी रुद्राक्ष — पितृ ऋण से मुक्ति

1 मुखी रुद्राक्ष सूर्य का है — और सूर्य पिता और पितरों का कारक है। पितृ दोष में 1 मुखी रुद्राक्ष पहनना बहुत शुभ माना जाता है।

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पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें

ज़रूर करें

✅ अपनी तिथि को श्राद्ध — विधिवत तर्पण
✅ सर्वपितृ अमावस्या (10 Oct) को — सभी पितरों का तर्पण
✅ कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन
✅ किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन
✅ पितरों का नाम लेकर उनसे माफी माँगो — अगर कभी उनके साथ बुरा व्यवहार हुआ
✅ पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाओ
✅ घर में शांति और सात्विक माहौल
✅ माता-पिता अगर जीवित हैं — उनकी सेवा करो

मत करें

🚫 श्राद्ध के दिन माँस, मछली, अंडा
🚫 Quarrel और अशांति
🚫 नए काम शुरू मत करो — property खरीदना, नई नौकरी join करना
🚫 बाल और नाखून कटवाना avoid करें
🚫 शराब और तामसिक भोजन
🚫 पितरों का अपमान — उनकी बुराई मत करो


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर पिता की मृत्यु की तिथि नहीं पता — कब श्राद्ध करें?
10 अक्टूबर 2026 — सर्वपितृ अमावस्या। यह सभी के लिए है जिनकी तिथि नहीं पता। इस दिन किया गया तर्पण सभी पितरों तक पहुँचता है।
क्या बेटियाँ श्राद्ध कर सकती हैं?
हाँ। शास्त्रों में लिखा है — अगर बेटा न हो तो बेटी, पत्नी, या पोता-पोती श्राद्ध कर सकते हैं। सबसे ज़रूरी है श्रद्धा — लिंग नहीं।
क्या पितृ पक्ष में रत्न पहनना बंद करना चाहिए?
नहीं। रत्न पहनते रहो। पितृ पक्ष में रत्न बंद करने की कोई शास्त्रीय विधि नहीं है। बस पितृ दोष के लिए गोमेद या 9 मुखी रुद्राक्ष — यह पहन सकते हो।
पितृ दोष और कालसर्प दोष — क्या connection है?
दोनों अक्सर साथ होते हैं। राहु-केतु दोनों पूर्वजों के karma से जुड़े हैं। जिनमें कालसर्प दोष है — उन्हें पितृ पक्ष में विशेष श्राद्ध करना चाहिए।
गोमेद रत्न कब पहनना चाहिए — पितृ पक्ष से पहले या बाद में?
पहले कुंडली दिखाओ — confirm करो कि गोमेद तुम्हारे लिए शुभ है। फिर शनिवार को पहनो — पितृ पक्ष से पहले भी चल सकता है, बाद में भी। पितृ पक्ष में पहनने का कोई special restriction नहीं।

पितृ पक्ष में कहाँ जाएं — प्रमुख तीर्थ

अगर गया, प्रयागराज या काशी जा सकते हो — तो पितृ पक्ष में वहाँ जाना बहुत पुण्यकारी है।

गया (बिहार): भगवान विष्णु के चरण यहाँ हैं। पिण्डदान के लिए सबसे पवित्र स्थान। गया में पिण्डदान से 7 पीढ़ियों को मोक्ष मिलता है — यह शास्त्र वचन है।

प्रयागराज: त्रिवेणी संगम पर तर्पण। मोक्ष की विशेष संभावना।

काशी (वाराणसी): यहाँ मृत्यु को भी मोक्ष देने वाली पुरी। पितृ पक्ष में विशेष महत्व।

हरिद्वार: हर की पौड़ी पर गंगा में तर्पण।

नासिक: त्र्यंबकेश्वर।

अगर नहीं जा सकते — तो घर पर भी विधिवत तर्पण उतना ही फलदायी है जब श्रद्धा हो।


पितृ पक्ष और अगली पीढ़ी

पितृ पक्ष सिर्फ पूर्वजों के लिए नहीं — यह अगली पीढ़ी के लिए भी है।

जो आज श्राद्ध करता है — उसके बच्चों और पोतों को भी आशीर्वाद मिलता है। यह एक chain है — पूर्वज आशीर्वाद देते हैं, हम उसे आगे pass करते हैं।

इसीलिए अपने बच्चों को पितृ पक्ष में साथ लेकर जाओ। उन्हें दादा-दादी, नाना-नानी के बारे में बताओ। यह cultural continuity है।


एक शास्त्रीय कथा — पितृ पक्ष का महत्व

महाभारत में कर्ण की कथा है। कर्ण अपने पूरे जीवन दान देते रहे — लेकिन उनके पितरों का श्राद्ध नहीं हुआ था क्योंकि उन्हें अपने पिता का पता नहीं था।

जब स्वर्ग में गए तो उन्हें सोना-चाँदी मिला — खाना नहीं। उन्होंने यमराज से पूछा। यमराज बोले — "तुमने सबको दान दिया — पर पितरों को नहीं।"

कर्ण को 16 दिन के लिए पृथ्वी पर वापस भेजा गया — ताकि वो श्राद्ध कर सकें। इन्हीं 16 दिनों को पितृ पक्ष कहते हैं।

यह कथा symbolic है — लेकिन संदेश साफ है। जिसने सबकुछ दिया — वह भी पितृ ऋण से बंधा था।


पितृ पक्ष 2026 — practical checklist

✅ अपने पितर की मृत्यु तिथि पता करो
✅ उस तिथि का श्राद्ध तालिका में देखो
✅ दोपहर 11:36-12:24 का समय रखो
✅ काले तिल, कुशा घास, तांबे का लोटा तैयार रखो
✅ कौवे के लिए भोजन
✅ 10 अक्टूबर — सर्वपितृ अमावस्या — यह ज़रूर करो
✅ पितृ दोष हो तो गोमेद या 9 मुखी रुद्राक्ष की सलाह लो
✅ माता-पिता जीवित हों तो उनकी सेवा करो — यह सबसे बड़ा श्राद्ध है


आखिरी बात — पितरों को क्या चाहिए

पितरों को सोना नहीं चाहिए, महंगा भोजन नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए — श्रद्धा। याद। और एक वादा — कि उनकी अगली पीढ़ी ठीक है।

जब तुम तर्पण देते हो — तो एक message जाता है पितृलोक में। "हम ठीक हैं। और हम तुम्हें याद करते हैं।"

इससे ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए उन्हें।

श्रद्धा से करो — विधि से करो। बाकी सब गुरु कृपा।

पितृ दोष की कुंडली देखवाओ

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🪬 पितृ दोष के उपाय — रत्न और रुद्राक्ष

गोमेद (Hessonite)  ·  9 मुखी रुद्राक्ष  ·  1 मुखी रुद्राक्ष  ·  लहसुनिया

संबंधित लेख: कालसर्प दोष · शनि साढ़ेसाती 2026 · गुरु सिंह गोचर 2026 · मकर राशि — नीलम


पितृ पक्ष में पूजा से पहले यह ज़रूर जानो

बहुत लोग पूछते हैं — "हमारे घर में कोई पंडित नहीं आता, क्या हम खुद श्राद्ध कर सकते हैं?"

बिल्कुल कर सकते हैं। शास्त्रों में "स्व-श्राद्ध" की अनुमति है। पंडित की ज़रूरत तभी है जब तुम्हें विधि नहीं पता। अगर सरल विधि से घर पर तर्पण करते हो — उतना भी पर्याप्त है।

श्राद्ध की सबसे ज़रूरी चीज़ — श्रद्धा। मंत्र याद न हो, विधि पूरी न हो — लेकिन दिल से पितरों को याद करो, पानी और तिल से तर्पण दो — यह काफी है।


पितृ दोष में कौन सा रत्न — detailed guide

पितृ दोष में रत्न का decision कुंडली पर निर्भर है। लेकिन एक general guidance:

अगर कुंडली में सूर्य + राहु की युति है:
सूर्य पिता का कारक है। राहु उसे पीड़ित कर रहा है। माणिक (सूर्य का रत्न) मदद कर सकता है — लेकिन तभी जब सूर्य शुभ भाव का स्वामी हो।

अगर कुंडली में चंद्र + राहु है:
मोती या गोमेद — ज्योतिषी तय करेंगे।

अगर नौवाँ भाव (पितृ भाव) afflicted है:
उस भाव के स्वामी का रत्न। ज्योतिषी से पूछो।

Safe option — हमेशा:
9 मुखी रुद्राक्ष + 1 मुखी रुद्राक्ष। किसी भी कुंडली में conflict नहीं। पितृ दोष में बहुत effective।


पितृ पक्ष में Gemshub का product range

Gemshub में पितृ दोष के लिए हमारे पास certified उत्पाद हैं:

गोमेद (Hessonite Garnet): Ceylon certified, natural। राहु को balance करता है। देखें →

9 मुखी रुद्राक्ष: Nepal certified। पितृ दोष में सबसे recommended। देखें →

1 मुखी रुद्राक्ष: दुर्लभ। सूर्य का रुद्राक्ष। पिता और पितरों के आशीर्वाद के लिए। देखें →

लहसुनिया (Cats Eye): केतु का रत्न। कालसर्प दोष + पितृ दोष दोनों में। देखें →


पितृ पक्ष में क्या दान करें

दान पितृ पक्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ specific चीज़ें जो पितरों को प्रसन्न करती हैं:

काले तिल: पितरों का प्रिय। तर्पण में भी और दान में भी।

सफेद कपड़े: किसी ज़रूरतमंद को।

जूते: शास्त्रों में पितृ पक्ष में जूतों का दान बहुत शुभ माना गया है।

छाता: सूर्य की गर्मी से बचाने वाला।

भोजन: गरीबों को खाना खिलाना — सबसे बड़ा दान।

गाय को चारा: गाय में सभी देवताओं का वास माना जाता है।


पितृ पक्ष में नए काम — हाँ या ना

यह सबसे common question है। शास्त्रों में पितृ पक्ष में कुछ नए काम वर्जित बताए गए हैं — लेकिन सब नहीं।

वर्जित: शादी। गृह प्रवेश। नया व्यापार शुरू। मुंडन या शादी की तरह के संस्कार।

वर्जित नहीं: Daily काम — नौकरी, पढ़ाई, business जो पहले से चल रहा हो। Property खरीदना — शास्त्रों में नहीं लिखा कि वर्जित है। नई नौकरी join करना।

आम लोगों में बहुत confusion है इस बारे में। बेहतर है कि ज्योतिषी से specific situation के बारे में पूछो।


पितृ पक्ष 2026 — special ग्रह स्थिति

2026 के पितृ पक्ष में एक interesting ग्रह स्थिति है। इस दौरान:

सूर्य कन्या राशि में होंगे। चंद्रमा different rashiyon से गुज़रेगा। बृहस्पति उच्च राशि कर्क में — यह बहुत शुभ है।

बृहस्पति कर्क में होने से इस साल के पितृ पक्ष का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। जो लोग इस बार विशेष श्रद्धा से श्राद्ध करेंगे — उन्हें पितरों का विशेष आशीर्वाद मिलेगा।


पितृ पक्ष और मानसिक स्वास्थ्य

यह एक modern angle है जिसे अक्सर ignore किया जाता है।

Psychology में "ancestral healing" एक recognized concept है। जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके प्रति gratitude express करते हैं — तो एक internal healing होती है।

अगर तुम्हारे मन में अपने माता-पिता के प्रति कोई unresolved guilt है — कुछ बात जो बोलनी रह गई, कुछ काम जो उनके जाने से पहले नहीं हो पाया — तो पितृ पक्ष उस को release करने का मौका है।

तर्पण करते समय मन ही मन उनसे बात करो। माफ़ी माँगो अगर कुछ बुरा हुआ था। कहो कि तुम उन्हें प्यार करते हो। यह सुनने में अजीब लगे — लेकिन बहुत शक्तिशाली है।


एक आखिरी प्रश्न — अगर पितर नाराज़ हों तो?

बहुत लोग डरते हैं — "अगर पितर हमसे नाराज़ हैं तो?"

शास्त्र कहते हैं — पितर कभी बच्चों का बुरा नहीं चाहते। वे माँ-बाप हैं — माँ-बाप चाहे कितने भी नाराज़ हों, अपने बच्चों का भला ही चाहते हैं।

पितर नाराज़ नहीं होते — वे बस तृप्त नहीं होते। जब तुम उन्हें याद करते हो, श्रद्धा से तर्पण देते हो — वे तृप्त होते हैं। और जब तृप्त होते हैं — आशीर्वाद देते हैं।

डरो मत। बस श्रद्धा रखो।


पितृ पक्ष का scientific angle

Modern science से पूर्णतः prove नहीं — लेकिन कुछ interesting connections हैं।

Epigenetics — एक field जो कहती है कि हमारे पूर्वजों के experiences हमारे genes में encoded हो सकते हैं। जो trauma उनका था — वो हमें affect कर सकता है।

Family Constellation Therapy — एक therapeutic approach जो मानती है कि परिवार के पुराने wounds अगली पीढ़ी में appear होते हैं।

इन दृष्टिकोण से देखें — तो पितृ पक्ष में श्राद्ध एक healing ritual है। पूर्वजों को release करना — उनके unfinished business को complete करना।

Science और spirituality — दोनों एक ही बात कह रहे हैं।


पितृ पक्ष 2026 में Gemshub से special consultation

पितृ दोष एक ऐसी स्थिति है जिसे सिर्फ रत्न से ठीक नहीं किया जा सकता। श्राद्ध, तर्पण और उपाय — तीनों साथ चलते हैं।

Gemshub में ज्योतिषाचार्य अशिष जैन जी — 20+ साल के अनुभव के साथ — तुम्हारी कुंडली देखकर बताएंगे:

कुंडली में पितृ दोष है या नहीं। कौन सा रत्न सबसे ज़्यादा helpful होगा। श्राद्ध की exact तिथि और विधि। और कोई special उपाय जो तुम्हारी situation के लिए सही हो।

पितृ पक्ष 2026 से पहले — अगस्त-सितंबर में — consultation लो। ताकि पितृ पक्ष आने पर तुम तैयार रहो।

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पितृ पक्ष 2026 — एक नज़र में

विवरण जानकारी
शुरुआत26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध)
समाप्ति10 अक्टूबर 2026 (सर्वपितृ अमावस्या)
कुल दिन16 दिन
सबसे महत्वपूर्ण दिन10 अक्टूबर — सर्वपितृ अमावस्या
माँ के लिए4 अक्टूबर — मातृ नवमी
सही समयदोपहर 11:36 से 12:24 बजे
मुख्य रत्नगोमेद (कुंडली देखकर)
Safe उपाय9 मुखी + 1 मुखी रुद्राक्ष
सबसे ज़रूरीश्रद्धा — बाकी सब गौण

माता-पिता जीवित हैं — तो यह पढ़ो

शास्त्रों में एक बात बहुत clearly लिखी है जो बहुत कम लोग जानते हैं।

"जीवते पितरि श्राद्धं न कुर्यात्" — जब पिता जीवित हों तब पितृश्राद्ध नहीं करते।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है — जब माता-पिता जीवित हों, तब उनकी सेवा ही सबसे बड़ा श्राद्ध है।

अगर तुम्हारे माता-पिता जीवित हैं — पितृ पक्ष में उन्हें call करो, मिलने जाओ, उनकी कोई ज़रूरत पूरी करो। यह उन पितरों का सबसे बड़ा सम्मान है जो तुम्हें देख रहे हैं।


पितृ पक्ष के बाद — नवरात्रि का उत्साह

पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को समाप्त होगा और ठीक अगले दिन — 11 अक्टूबर से — शारदीय नवरात्रि का माहौल शुरू हो जाएगा।

यह transition बहुत significant है। पितृ पक्ष में हम अपने पूर्वजों का ऋण चुकाते हैं — और नवरात्रि में माँ शक्ति का आह्वान करते हैं। एक completion है, फिर एक नई शुरुआत।

पितृ पक्ष के बाद माँ दुर्गा की कृपा और जल्दी मिलती है — क्योंकि पितर तृप्त हो चुके हैं।


पितृ दोष — कब तक रहता है

यह बहुत common question है।

पितृ दोष कुंडली में है — तो जीवनभर रहेगा। लेकिन इसका intensity घटती-बढ़ती रहती है।

जब सूर्य की दशा हो, राहु की दशा हो, या नौवाँ भाव activated हो — तब पितृ दोष का असर ज़्यादा।

लेकिन हर साल पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से — दोष का असर धीरे-धीरे कम होता जाता है। यह एक lifetime practice है, एक बार का काम नहीं।

जो लोग हर साल नियमित रूप से श्राद्ध करते हैं — उनके जीवन में पितृ दोष का negative असर बहुत कम हो जाता है।


नई पीढ़ी के लिए — पितृ पक्ष को modern रूप में समझो

अगर तुम 25-35 साल के हो और सोचते हो — "यह सब पुराने ज़माने की बातें हैं" — तो एक modern perspective:

Ancestral healing, family systems therapy, epigenetics — ये सब वही कह रहे हैं जो हमारे शास्त्र 5000 साल से कह रहे हैं।

हमारे पूर्वजों ने क्या किया, क्या सहा, क्या struggle किया — वो हमारे DNA में है। उनको याद करना, उनके प्रति gratitude रखना — यह हमारी healing है।

पितृ पक्ष एक ritual है — लेकिन उसके पीछे एक deep psychological truth है।

इस साल — एक बार try करो। श्रद्धा के साथ। देखो क्या होता है।

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