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ज्योतिष और रत्न

कालसर्प दोष क्या है? 12 प्रकार, लक्षण, रत्न और पक्के उपाय — पूरी जानकारी

Gemshub Team 28 Jun 2026 2 views 1 min read
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कालसर्प दोष क्या है? 12 प्रकार, लक्षण, रत्न और पक्के उपाय — पूरी जानकारी | Gemshub International

एक बार हमारे पास एक 35 साल के engineer आए — पुणे से। बोले — "भाईसाहब, पिछले 10 साल से एक ही जगह पर हूँ। Promotion का हर बार वादा होता है, हर बार कुछ न कुछ हो जाता है। Business शुरू किया — partner ने धोखा दिया। शादी हुई — तीन साल में तलाक। बहुत मेहनत करता हूँ लेकिन जैसे कोई invisible wall है।"

कुंडली देखी। पूर्ण कालसर्प दोष था — अनंत कालसर्प। राहु लग्न में, केतु सप्तम में, और सभी सात ग्रह बीच में।

"यह कोई श्राप नहीं है," हमने कहा। "यह एक specific ज्योतिषीय situation है। इसका उपाय है — और आप इससे निकल सकते हैं।"

आज उस व्यक्ति की अपनी consultancy firm है। लेकिन वो रास्ता आसान नहीं था।

आज इस लेख में बात करेंगे — कालसर्प दोष क्या है, कैसे बनता है, कितने प्रकार के होते हैं, कैसे पहचानें, और सबसे ज़रूरी — कौन सा रत्न और उपाय करें।


कालसर्प दोष — क्या है और कैसे बनता है

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को "छाया ग्रह" कहते हैं। ये दोनों हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने होते हैं — यानी 180 डिग्री के अंतर पर। ये दोनों मिलकर एक axis बनाते हैं।

जब किसी की जन्मकुंडली में सभी सात ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं — और दूसरी तरफ कोई ग्रह नहीं होता — तब कालसर्प दोष बनता है।

नाम से मत डरो — "काल" यानी समय या मृत्यु, "सर्प" यानी साँप। यह नाम symbolic है। इसका मतलब है कि व्यक्ति का जीवन एक सर्प के फन के नीचे — यानी राहु-केतु के प्रभाव में — चलता है।

एक ज़रूरी बात: पुराने शास्त्रों में कालसर्प दोष का direct उल्लेख नहीं है। यह modern jyotish का concept है। इसलिए इससे जितना डरा जाता है — उतना डरने की ज़रूरत नहीं। यह एक ज्योतिषीय situation है, कोई अभिशाप नहीं।

पूर्ण vs आंशिक कालसर्प दोष

पूर्ण कालसर्प दोष: जब सभी सातों ग्रह राहु-केतु के ठीक बीच में हों — कोई ग्रह बाहर न हो। यह ज़्यादा intense होता है।

आंशिक (Partial) कालसर्प दोष: जब एक-दो ग्रह राहु-केतु axis के बाहर हों। यह थोड़ा कम प्रभावशाली होता है।


कालसर्प दोष के 12 प्रकार — सबको एक जगह

राहु और केतु की कुंडली में अलग-अलग भावों में स्थिति के अनुसार 12 प्रकार के कालसर्प दोष होते हैं। हर एक का अलग नाम और अलग असर होता है।

# नाम राहु-केतु स्थान मुख्य प्रभाव
1अनंतराहु 1, केतु 7व्यक्तित्व, वैवाहिक जीवन में समस्या
2कुलिकराहु 2, केतु 8धन, परिवार, वाणी में समस्या
3वासुकीराहु 3, केतु 9भाई-बहन, भाग्य में रुकावट
4शंखपालराहु 4, केतु 10घर, माँ, करियर में बाधा
5पद्मराहु 5, केतु 11संतान, प्रेम, आय में समस्या
6महापद्मराहु 6, केतु 12शत्रु, स्वास्थ्य, अचानक खर्च
7तक्षकराहु 7, केतु 1विवाह, साझेदारी में धोखा
8कर्कोटकराहु 8, केतु 2अचानक संकट, मृत्युभय
9शंखचूड़राहु 9, केतु 3धर्म, पिता, भाग्य पर असर
10घातकराहु 10, केतु 4करियर, सरकारी कार्य में बाधा
11विषधरराहु 11, केतु 5लाभ में रुकावट, संतान चिंता
12शेषनागराहु 12, केतु 6विदेश यात्रा में बाधा, नींद समस्या

कालसर्प दोष के लक्षण — कैसे पहचानें

यह section सबसे ज़रूरी है। बहुत लोग बिना कुंडली देखे खुद को कालसर्प दोष वाला मान लेते हैं। लक्षणों से एक idea मिलता है — लेकिन confirm करने के लिए कुंडली देखना ज़रूरी है।

सपनों में संकेत

कालसर्प दोष का सबसे characteristic लक्षण है — सर्प से जुड़े सपने। बार-बार साँप दिखना, साँप का काटना, या मृत व्यक्तियों से मुलाकात के सपने। अगर यह pattern regularly आ रहा है — तो कुंडली देखवाना चाहिए।

जीवन में pattern

बहुत मेहनत के बावजूद results नहीं मिलते। जब भी कुछ अच्छा होने वाला हो — कुछ न कुछ हो जाता है। जैसे कोई invisible wall हो।

Career में repeatedly रुकावट। Business में partner का धोखा। शादी में बार-बार बाधा — या शादी के बाद समस्याएं।

मानसिक और शारीरिक

बिना कारण डर और anxiety। अकेलापन — बहुत लोगों के बीच होते हुए भी। Mental restlessness। कभी-कभी death का अचानक डर।

परिवार में

परिवार में बार-बार बीमारी। किसी की अकाल मृत्यु। माँगलिक कार्यों में बार-बार रुकावट।

ध्यान रखो: ये लक्षण कालसर्प दोष के indicator हैं, proof नहीं। बहुत से लोगों को इनमें से कुछ लक्षण होते हैं बिना कालसर्प दोष के। कुंडली देखकर ही confirm करो।

कालसर्प दोष का सच — जो कोई नहीं बताता

यहाँ एक बहुत honest बात करनी है जो ज़्यादातर लोग नहीं बताते।

कालसर्प दोष वाले बहुत से लोग जीवन में बहुत बड़ी सफलता पाते हैं। इतिहास में बहुत से प्रसिद्ध व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प दोष था।

कालसर्प दोष दो तरीके से काम करता है:

अगर व्यक्ति के जीवन में शुभ राजयोग भी हों — तो कालसर्प दोष उन्हें delay करता है लेकिन ultimately बहुत बड़ी सफलता मिलती है। जैसे पहले बहुत struggle — फिर बहुत ऊँचाई।

अगर कुंडली में कोई शुभ योग नहीं — तो जीवन में continuous problems।

इसीलिए कुंडली का विस्तृत विश्लेषण ज़रूरी है — सिर्फ कालसर्प दोष देखना काफी नहीं।


कालसर्प दोष में रत्न — गोमेद और लहसुनिया

यह वह section है जो Gemshub के readers के लिए सबसे important है।

कालसर्प दोष में दो रत्नों की सबसे ज़्यादा चर्चा होती है:

गोमेद (Hessonite Garnet) — राहु का रत्न

राहु का रत्न गोमेद है। कालसर्प दोष में राहु की भूमिका बहुत central है — वह "सिर" की तरह है। गोमेद पहनने से राहु की energy को channel किया जाता है।

लेकिन यहाँ एक बहुत ज़रूरी बात — गोमेद हर कालसर्प दोष में नहीं पहनना चाहिए।

गोमेद तब पहनें जब:

कुंडली में राहु शुभ भाव का स्वामी हो। राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो। ज्योतिषी ने कुंडली देखकर अनुमति दी हो।

गोमेद तब नहीं पहनें जब:

कुंडली में राहु अशुभ भाव (6, 8, 12) का स्वामी हो। राहु पहले से ही बहुत strong हो — तब गोमेद उसे और ज़्यादा intense बना देता है।

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लहसुनिया (Cat's Eye / Chrysoberyl) — केतु का रत्न

केतु का रत्न लहसुनिया है। कालसर्प दोष में केतु "पूँछ" की तरह है। लहसुनिया केतु की energy को balance करता है।

लहसुनिया के बारे में एक unique बात — यह बहुत quickly result देता है। 24-48 घंटे में असर दिखने लगता है — positive या negative। इसीलिए लहसुनिया पहनने से पहले 72 घंटे का परीक्षण अनिवार्य है।

लहसुनिया तब पहनें जब:

केतु की महादशा चल रही हो। Spiritual growth के लिए — केतु मोक्ष का कारक है। ज्योतिषी ने अनुमति दी हो।

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क्या दोनों साथ पहन सकते हैं?

राहु और केतु शत्रु नहीं हैं — लेकिन दोनों की energy अलग है। गोमेद और लहसुनिया साथ पहनने के बारे में ज्योतिषी अलग-अलग राय रखते हैं।

हमारा अनुभव — पहले एक पहनो, तीन महीने observe करो। फिर ज्योतिषी से पूछकर दूसरा जोड़ो।

रुद्राक्ष — रत्न से भी safe विकल्प

कालसर्प दोष में रुद्राक्ष रत्नों से ज़्यादा safe है — क्योंकि यह किसी को suit नहीं करता, suit न करने का कोई risk नहीं।

8 मुखी रुद्राक्ष — राहु का रुद्राक्ष। कालसर्प दोष में सबसे recommended। 8 मुखी रुद्राक्ष देखें

9 मुखी रुद्राक्ष — केतु का रुद्राक्ष। लहसुनिया का safe alternative। 9 मुखी रुद्राक्ष देखें

दोनों साथ पहन सकते हो — कोई conflict नहीं।


कालसर्प दोष के उपाय — जो actually काम करते हैं

1. नागपंचमी की पूजा

साल में एक बार नागपंचमी के दिन नाग देवता की विशेष पूजा करें। नाग देवता और कालसर्प दोष का सीधा संबंध है। इस दिन किसी शिव मंदिर में नाग की मूर्ति को दूध से अभिषेक करें।

2. त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा

महाराष्ट्र के नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर — यह कालसर्प दोष निवारण के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान है। यहाँ विशेष पूजा होती है। एक बार ज़रूर जाना चाहिए।

इसके अलावा उज्जैन का महाकालेश्वर और आंध्र का कालाहस्ती भी प्रसिद्ध हैं।

3. महामृत्युंजय मंत्र जाप

"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्"

रोज़ 108 बार। यह मंत्र कालसर्प दोष के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सोमवार को विशेष रूप से।

4. राहु और केतु के मंत्र

राहु मंत्र: "ॐ राहवे नमः" — 108 बार रोज़।

केतु मंत्र: "ॐ केतवे नमः" — 108 बार रोज़।

5. पितृ तर्पण

कालसर्प दोष अक्सर पितृ दोष से जुड़ा होता है — पूर्वजों का अतृप्त आत्मा। पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करना बहुत ज़रूरी है। पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना।

6. शिव पूजा — सोमवार

हर सोमवार शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाओ। राहु और केतु दोनों भगवान शिव से जुड़े हैं। शिव की कृपा से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है।

7. सर्पदंश के डर से सर्प की सोने-चाँदी की मूर्ति दान

यह एक traditional उपाय है — चाँदी या सोने से बनी नाग-नागिन की जोड़ी किसी शिव मंदिर में दान करें। कालसर्प दोष में यह बहुत effective माना जाता है।


कालसर्प दोष में क्या न करें

🚫 सर्प को कभी न मारो — यह कालसर्प दोष को और बढ़ाता है।

🚫 नागपंचमी को नाग को दूध पिलाने से बचो — प्रतीकात्मक पूजा करो।

🚫 बिना कुंडली देखे गोमेद या लहसुनिया मत पहनो।

🚫 किसी के बहकावे में आकर expensive "कालसर्प दोष निवारण यंत्र" मत खरीदो बिना जाँचे।

🚫 किसी से पैसे देकर "दोष transfer" करवाने का झाँसा मत लो — यह fraud है।


कालसर्प दोष और करियर — specifically क्या होता है

कालसर्प दोष में करियर पर जो pattern दिखता है वो बहुत specific है:

काम बहुत करते हो — recognition कम मिलती है। जब promotion का समय आता है — कुछ न कुछ हो जाता है। Business partner धोखा दे सकते हैं। Job में ऐसा लगता है जैसे ceiling है — उससे ऊपर नहीं जा पा रहे।

लेकिन यह भी सच है — जो लोग इस संघर्ष में टिके रहते हैं, उन्हें जब भाग्य का साथ मिलता है तो वो बहुत ऊँचाई पाते हैं। देर से मिलता है — लेकिन मिलता है।


कालसर्प दोष और विवाह

विवाह में देरी और विवाहित जीवन में समस्याएं — यह कालसर्प दोष का बहुत common प्रभाव है।

अनंत कालसर्प (राहु 1, केतु 7) — सातवाँ भाव विवाह का है, इसलिए इसमें विवाह पर सबसे ज़्यादा असर।

तक्षक कालसर्प (राहु 7) — partner से धोखे की संभावना।

उपाय: विवाह से पहले कुंडली मिलान ज़रूर करवाओ। और कालसर्प दोष निवारण पूजा करवाओ।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कालसर्प दोष में गोमेद पहनना ज़रूरी है?
नहीं — हमेशा नहीं। गोमेद तभी पहनें जब कुंडली में राहु शुभ हो और ज्योतिषी ने अनुमति दी हो। गलत situation में गोमेद नुकसान कर सकता है। रुद्राक्ष ज़्यादा safe है।
क्या कालसर्प दोष जीवनभर रहता है?
कुंडली में तो रहता है — लेकिन इसका intensity घटती-बढ़ती रहती है। जब राहु-केतु की दशा हो — ज़्यादा effect। बाकी दशाओं में कम। उपाय करने से effect और कम होता है।
Online कुंडली से कालसर्प दोष check कर सकते हैं?
हाँ, एक idea मिल जाता है। लेकिन किसी experienced ज्योतिषी से in-person analysis ज़्यादा accurate होती है। Software सब factors नहीं देख पाता।
क्या कालसर्प दोष की पूजा करवानी ज़रूरी है?
अगर दोष intense हो तो पूजा बहुत helpful है — खासकर त्र्यंबकेश्वर में। लेकिन रोज़ के मंत्र जाप, शिव पूजा, और पितृ तर्पण भी उतने ही effective हैं। पूजा एकमात्र उपाय नहीं।
कालसर्प दोष में 8 मुखी रुद्राक्ष कैसे पहनें?
शनिवार की सुबह पहनें। पहले "ॐ राहवे नमः" 108 बार जपें। चाँदी या काले धागे में। गले में या कलाई में। कोई special उंगली नहीं — यह रुद्राक्ष है, रत्न नहीं।

एक नज़र में — कालसर्प दोष summary

विषय जानकारी
क्या हैसभी ग्रह राहु-केतु के बीच
प्रकार12 — अनंत से शेषनाग तक
मुख्य रत्नगोमेद (राहु), लहसुनिया (केतु) — कुंडली देखकर
रुद्राक्ष8 मुखी + 9 मुखी — safe
मुख्य उपायमहामृत्युंजय मंत्र, शिव पूजा, पितृ तर्पण
पूजा स्थानत्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, कालाहस्ती
डरना चाहिए?नहीं — यह situation है, श्राप नहीं

आखिरी बात

कालसर्प दोष को जितना डराया जाता है — वह उचित नहीं है। यह एक ज्योतिषीय situation है जिसे समझकर उपाय किए जा सकते हैं।

सबसे पहले — कुंडली देखवाओ। Confirm करो कि दोष है या नहीं। फिर सही उपाय करो।

रत्न लेने से पहले — ज्योतिषी की सलाह। गोमेद और लहसुनिया powerful हैं — गलत situation में नुकसान कर सकते हैं।

अगर कुंडली देखवानी हो या सही रत्न जानना हो — Gemshub में ज्योतिषाचार्य अशिष जैन जी से मिलो।

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कालसर्प दोष — प्रकार अनुसार विस्तृत जानकारी

हर प्रकार का कालसर्प दोष अलग भाव से जुड़ा होता है — इसलिए हर एक का असर और उपाय अलग होता है। यहाँ सबसे common चार प्रकारों को detail में समझते हैं।

अनंत कालसर्प दोष (राहु लग्न, केतु सप्तम)

यह सबसे common type है। राहु पहले भाव में — यानी सीधे लग्न पर। इसका व्यक्ति के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, और विवाह पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है।

जातक में आत्मविश्वास की कमी रहती है — बाहर से confident दिखते हैं, अंदर से insecure। विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में tension। Partners में trust issue।

उपाय: सोमवार को शिव पूजा। विवाह से पहले कालसर्प दोष निवारण पूजा। गोमेद — कुंडली देखकर।

कुलिक कालसर्प दोष (राहु दूसरे भाव, केतु आठवें)

दूसरा भाव धन और परिवार का। आठवाँ भाव अचानक घटनाओं का।

इसमें धन आता है पर रुकता नहीं। परिवार में कलह। वाणी में कटुता — जो बोलते हैं वो रिश्तों को hurt करता है। कभी-कभी अचानक धन हानि।

उपाय: राहु मंत्र जाप। परिवार में मधुर व्यवहार — जानबूझकर। गोमेद — ज्योतिषी की सलाह से।

पद्म कालसर्प दोष (राहु पाँचवें, केतु ग्यारहवें)

पाँचवाँ भाव संतान, प्रेम, और बुद्धि का। ग्यारहवाँ भाव लाभ का।

संतान में देरी या संतान सुख में कमी। प्रेम में धोखा हो सकता है। बुद्धि तेज़ होती है लेकिन use नहीं हो पाती। Income regular नहीं — कभी बहुत, कभी कुछ नहीं।

उपाय: संतान गोपाल मंत्र। महामृत्युंजय जाप। पितृ तर्पण — क्योंकि संतान की समस्या में पितृ दोष भी जुड़ा होता है।

शंखपाल कालसर्प दोष (राहु चौथे, केतु दसवें)

चौथा भाव घर, माँ, और सुख का। दसवाँ भाव करियर का।

घर में शांति कम। माँ के स्वास्थ्य की चिंता। करियर में जब भी ऊँचाई मिलने वाली हो — कुछ न कुछ हो जाता है। सरकारी मामलों में परेशानी।

उपाय: माँ की सेवा। घर में मंगल वातावरण। गोमेद — कुंडली देखकर।


कालसर्प दोष और पितृ दोष — connection

बहुत कम लोग जानते हैं कि कालसर्प दोष और पितृ दोष अक्सर साथ-साथ होते हैं।

पितृ दोष तब होता है जब पूर्वजों की आत्मा तृप्त नहीं है — उनका श्राद्ध नहीं हुआ, या उनके साथ कोई अन्याय हुआ।

राहु-केतु past karma और पूर्वजों से जुड़े हैं। इसीलिए कालसर्प दोष में पितृ तर्पण इतना important है।

अगर कालसर्प दोष है तो:

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण ज़रूर करो। पीपल के पेड़ पर हर शनिवार जल चढ़ाओ। किसी ब्राह्मण को पितरों के नाम से भोजन करवाओ।


कालसर्प दोष में सफल लोग — यह बहुत ज़रूरी angle है

कालसर्प दोष को सिर्फ negative light में देखना गलत है।

कालसर्प दोष एक powerful yoga भी है। जब इसमें शुभ ग्रहों का साथ हो — तो यह व्यक्ति को extraordinary बनाता है।

इसकी एक unique quality है — यह व्यक्ति को एकाग्र बनाता है। जब सभी ग्रह एक ही तरफ हों — तो उनकी combined energy एक direction में focus होती है। यही focus कभी-कभी असाधारण सफलता का कारण बनती है।

इसीलिए ज्योतिष में इसे "कालसर्प योग" भी कहते हैं — सिर्फ "दोष" नहीं।


गोमेद — खरीदने से पहले ये ज़रूर जानो

बाज़ार में बहुत तरह के "गोमेद" मिलते हैं। लेकिन ज्योतिष के लिए सही गोमेद क्या है — यह जानना ज़रूरी है।

Hessonite Garnet — यही असली ज्योतिषीय गोमेद है। इसका certificate पर "Hessonite" लिखा होना चाहिए।

Orange Garnet — यह अलग है। ज्योतिष में काम नहीं आता।

Almandine Garnet — लाल रंग का garnet। गोमेद नहीं।

Certificate पर "Hessonite Garnet" और "Natural" लिखा होना चाहिए। GIA, IGI, या IIGJ का certificate लो।

रंग — honey yellow से orange-brown। बहुत dark या बहुत pale — कम effective।

वज़न — कम से कम 5 रत्ती। 7-9 रत्ती ज़्यादा प्रभावशाली।


लहसुनिया — वह रत्न जो 24 घंटे में बता देता है

लहसुनिया (Cats Eye / Chrysoberyl) की एक unique quality है जो इसे बाकी सब रत्नों से अलग बनाती है।

यह बहुत तेज़ रत्न है — नीलम से भी तेज़ कुछ मामलों में। पहनने के 24-48 घंटे में ही पता चल जाता है कि suit करता है या नहीं।

72 घंटे का परीक्षण अनिवार्य: शनिवार की रात तकिए के नीचे रखो। तीन दिन observe करो — नींद, सपने, मन, घर का माहौल।

अगर suit करे — अच्छी नींद, positive energy, opportunities आना शुरू।

अगर suit न करे — बुरे सपने, बेचैनी, घर में कलह।

लहसुनिया की पहचान — इसमें "cats eye" effect होता है। जब light इस पर पड़ती है तो एक thin line दिखती है — बिल्ली की आँख की पुतली जैसी। यही इसकी असलियत की पहचान है।


8 मुखी रुद्राक्ष — कालसर्प दोष का सबसे safe उपाय

अगर तुम confusion में हो — गोमेद पहनूँ या नहीं — तो 8 मुखी रुद्राक्ष से शुरू करो।

8 मुखी रुद्राक्ष राहु को represent करता है। यह राहु की negative energy को absorb करता है और positive में convert करता है।

किसी को भी suit करता है — कोई restriction नहीं। कोई 72 घंटे परीक्षण नहीं। कोई कुंडली analysis ज़रूरी नहीं।

9 मुखी रुद्राक्ष केतु के लिए। दोनों साथ पहनना बहुत effective है कालसर्प दोष में।


कालसर्प दोष में meditation और spiritual practice

कालसर्प दोष वाले लोगों में अक्सर एक natural spiritual inclination होती है। राहु-केतु का axis मोक्ष और karma से जुड़ा है।

अगर तुम्हारी कुंडली में कालसर्प दोष है — तो meditation, yoga, और spiritual practice तुम्हारे लिए दूसरों से ज़्यादा effective होगी।

विशेष रूप से:

सोमवार को शिव ध्यान। नाग देवता का visualization। महामृत्युंजय मंत्र के साथ breathing exercise।

यह उपाय करने से कालसर्प दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता है।


Gemshub में कालसर्प दोष की guidance

2003 से हम कालसर्प दोष वाले बहुत से जातकों को सही रत्न और उपाय दे रहे हैं।

एक बात जो हम हमेशा कहते हैं — पहले कुंडली देखो, फिर रत्न लो। गोमेद या लहसुनिया के बारे में खुद decide मत करो — यह powerful रत्न हैं।

ज्योतिषाचार्य अशिष जैन जी से कुंडली दिखाओ। वो बताएंगे कि तुम्हारे specific कालसर्प दोष में क्या करना चाहिए।

📱 +91 9968240294 — WhatsApp करो। हिंदी में बात करो।

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