रत्न है, अभिमंत्रण हो गया — अब पहनें कब? सुबह 6 बजे? दोपहर में? या शाम को?
रत्न पहनने का समय — यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना रत्न का चुनाव। सही मुहूर्त में पहना रत्न अपनी पूरी ऊर्जा देता है।
हर रत्न का शुभ दिन और समय
| रत्न | शुभ वार | सर्वश्रेष्ठ समय | चंद्र स्थिति |
|---|---|---|---|
| माणिक | रविवार | सूर्योदय से 1 घंटे के भीतर | शुक्ल पक्ष |
| मोती | सोमवार | सुबह 6-8 बजे | शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा श्रेष्ठ |
| मूंगा | मंगलवार | सुबह 7-9 बजे | शुक्ल पक्ष |
| पन्ना | बुधवार | सुबह 6-8 बजे | शुक्ल पक्ष |
| पुखराज | गुरुवार | सुबह 6-7 बजे | शुक्ल पक्ष |
| हीरा / White Sapphire | शुक्रवार | सुबह 6-8 बजे | शुक्ल पक्ष |
| नीलम | शनिवार | सुबह 5-7 बजे | शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष |
| गोमेद | शनिवार | सूर्यास्त से पहले | कृष्ण पक्ष |
| लहसुनिया | मंगलवार / शनिवार | सुबह या शाम | कृष्ण पक्ष |
शुक्ल पक्ष क्यों?
शुक्ल पक्ष — अमावस्या से पूर्णिमा तक — चंद्रमा बढ़ता है। इस दौरान ऊर्जा बढ़ने की दिशा में होती है। रत्न पहनने के लिए यह सबसे शुभ है।
अमावस्या और ग्रहण के दिन रत्न न पहनें।
राहु काल में रत्न न पहनें
हर दिन एक निश्चित समय राहु काल होता है। इस समय कोई शुभ काम न करें। Panchang app से राहु काल देखें।
निष्कर्ष
सही वार, सही समय, शुक्ल पक्ष — यह तीनों मिलकर रत्न का असर multiply करते हैं। Ashish Jain जी से कुंडली के अनुसार सटीक मुहूर्त जानें।