रत्न खरीद लिया। अब सीधे पहन लें? नहीं।
रत्न को पहनने से पहले अभिमंत्रण जरूरी है। अभिमंत्रण का मतलब है — रत्न को शुद्ध करना और उसे अपने ग्रह की ऊर्जा से जोड़ना।
बिना अभिमंत्रण के रत्न एक साधारण पत्थर की तरह है। अभिमंत्रण के बाद वह एक ऊर्जामय माध्यम बन जाता है।
अभिमंत्रण से पहले — शुद्धिकरण
हर रत्न को पहनने से पहले शुद्ध करें:
- रत्न को कच्चे दूध में 10 मिनट रखें।
- फिर गंगाजल से धोएं।
- शहद में 5 मिनट रखें।
- फिर से गंगाजल से धोकर साफ कपड़े से पोंछें।
मोती को सिर्फ गंगाजल से धोएं — दूध या शहद से नहीं।
हर रत्न का अभिमंत्रण
| रत्न | दिन | मंत्र | जप संख्या |
|---|---|---|---|
| माणिक | रविवार | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः | 108 |
| मोती | सोमवार | ॐ सोमाय नमः | 108 |
| मूंगा | मंगलवार | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः | 108 |
| पन्ना | बुधवार | ॐ बुं बुधाय नमः | 108 |
| पुखराज | गुरुवार | ॐ बृं बृहस्पतये नमः | 108 |
| हीरा / White Sapphire | शुक्रवार | ॐ शुं शुक्राय नमः | 108 |
| नीलम | शनिवार | ॐ शं शनैश्चराय नमः | 108 |
| गोमेद | शनिवार | ॐ रां राहवे नमः | 108 |
| लहसुनिया | मंगलवार | ॐ कें केतवे नमः | 108 |
घर पर अभिमंत्रण की पूरी विधि
- सुबह स्नान करें, साफ कपड़े पहनें।
- पूजा स्थान पर पीले या लाल कपड़े बिछाएं।
- शुद्ध किया हुआ रत्न रखें।
- घी का दीपक जलाएं, धूप जलाएं।
- संबंधित ग्रह देवता को फूल चढ़ाएं।
- मंत्र 108 बार जपें — रत्न को हाथ में लेकर।
- भगवान से प्रार्थना करें कि रत्न आपके जीवन में शुभ फल दे।
- उसी दिन रत्न पहन लें।
क्या ज्योतिषी से अभिमंत्रित करवाना जरूरी है?
नहीं — घर पर भी अभिमंत्रण प्रभावशाली होता है। लेकिन अगर किसी अनुभवी ज्योतिषी से करवा सकते हैं तो बेहतर है। Ashish Jain जी रत्न अभिमंत्रण की सेवा भी देते हैं।
निष्कर्ष
अभिमंत्रण — यह रत्न को activate करने की प्रक्रिया है। इसके बिना रत्न अपनी पूरी ऊर्जा नहीं देता। हर बार रत्न पहनने से पहले यह प्रक्रिया अपनाएं।