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राहु काल क्या है — आज का राहु काल, क्यों बचें और क्या करें

Gemshub Team 31 May 2026 0 views
राहु काल क्या है — आज का राहु काल, क्यों बचें और क्या करें | Gemshub International

सुबह उठकर कोई बड़ा काम शुरू करने वाले थे — नया व्यापार, नई नौकरी का पहला दिन, घर की नींव रखना। और किसी बड़े-बुजुर्ग ने रोक दिया — "अरे, अभी राहु काल है। रुको।"

यह दृश्य लगभग हर हिंदू घर में होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि राहु काल क्यों अशुभ माना जाता है? इसमें क्या-क्या नहीं करना चाहिए? और अगर जरूरी काम हो तो क्या करें?

आइए विस्तार से जानते हैं।


राहु काल क्या है?

राहु काल (Rahu Kaal) दिन का वह समय होता है जब राहु ग्रह का प्रभाव विशेष रूप से प्रबल होता है।

वैदिक ज्योतिष में राहु एक छाया ग्रह है — यानी इसका कोई वास्तविक शरीर नहीं है। यह चंद्रमा के उत्तरी नोड (North Node) का प्रतिनिधित्व करता है।

राहु को अशुभ और अनिश्चित परिणाम देने वाला माना जाता है। इसलिए जब राहु का प्रभाव दिन में प्रबल होता है, उस समय कोई शुभ कार्य शुरू करना अनुचित माना जाता है।


राहु काल कैसे निकाला जाता है?

प्रत्येक दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 भागों में बाँटा जाता है। इनमें से एक भाग राहु काल का होता है।

हर भाग की अवधि लगभग 1 घंटा 30 मिनट होती है (यह सूर्योदय-सूर्यास्त की कुल अवधि पर निर्भर करती है)।

हर दिन का राहु काल — सामान्य समय (भारत में)

दिन राहु काल का क्रम
सोमवार दिन का दूसरा भाग (लगभग 7:30 - 9:00 बजे)
मंगलवार दिन का सातवाँ भाग (लगभग 3:00 - 4:30 बजे)
बुधवार दिन का पाँचवाँ भाग (लगभग 12:00 - 1:30 बजे)
बृहस्पतिवार दिन का छठा भाग (लगभग 1:30 - 3:00 बजे)
शुक्रवार दिन का चौथा भाग (लगभग 10:30 - 12:00 बजे)
शनिवार दिन का तीसरा भाग (लगभग 9:00 - 10:30 बजे)
रविवार दिन का आठवाँ भाग (लगभग 4:30 - 6:00 बजे)

ध्यान रखें: यह समय स्थान और मौसम के अनुसार बदलता है। सटीक राहु काल के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

याद रखने का आसान तरीका

"मा बा श गु शु बु र" — यह क्रम याद करें:

  • मा (सोमवार) — दूसरा भाग
  • बा (मंगलवार) — सातवाँ भाग
  • (शनिवार) — तीसरा भाग
  • गु (बृहस्पति) — छठा भाग
  • शु (शुक्रवार) — चौथा भाग
  • बु (बुधवार) — पाँचवाँ भाग
  • (रविवार) — आठवाँ भाग

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?

बिल्कुल न करें:

नया व्यापार या काम शुरू करना — राहु अनिश्चितता का प्रतीक है ❌ नई नौकरी का पहला दिनगृह प्रवेश या नींव रखनाविवाह या सगाईबड़ी खरीदारी — जमीन, गाड़ी, सोना ❌ यात्रा शुरू करना (लंबी या महत्वपूर्ण) ❌ ऑपरेशन या बड़ा चिकित्सीय उपायकर्ज लेना या देनामहत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षरनया वाहन खरीदना या चलाना


राहु काल में क्या कर सकते हैं?

यह भी जानना जरूरी है कि राहु काल में सब कुछ बंद नहीं हो जाता।

राहु काल में कर सकते हैं:

पहले से शुरू किए गए काम जारी रखना — सिर्फ नए काम की शुरुआत अशुभ है ✅ रोज के काम — ऑफिस जाना, खाना बनाना, पढ़ाई करना ✅ पूजा-पाठ — राहु काल में राहु की पूजा शुभ मानी जाती है ✅ ध्यान और योगपुराने मामलों को सुलझानाआराम करना


राहु ग्रह क्या है — संक्षिप्त परिचय

राहु वैदिक ज्योतिष में एक रहस्यमय ग्रह है।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देव और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तो अमृत निकला। एक दानव ने देवताओं का वेश धारण करके अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया — लेकिन अमृत गले तक पहुँच चुका था, इसलिए वह दोनों भागों में जीवित रहा।

सिर का भाग राहु और धड़ का भाग केतु बना।

राहु भ्रम, अचानक बदलाव, विदेश, तकनीक, राजनीति का कारक है। इसका प्रभाव अनिश्चित और अचानक होता है — इसीलिए राहु काल को अशुभ माना जाता है।


राहु दोष — कब और क्यों लगता है?

कुंडली में राहु जब कुछ विशेष स्थानों पर हो, तो राहु दोष माना जाता है:

  • पहले भाव में राहु — व्यक्तित्व पर असर
  • चौथे भाव में — घर-परिवार में अशांति
  • सातवें भाव में — विवाह में समस्या
  • दसवें भाव में — करियर में उतार-चढ़ाव

राहु दोष के लक्षण:

  • अचानक और बड़ी परेशानियाँ
  • अजीब सपने और बेचैनी
  • झूठ या धोखे का शिकार होना
  • अनिश्चितता और भ्रम
  • मानसिक अशांति

राहु दोष निवारण के उपाय

1. राहु काल में राहु की पूजा

यह सुनकर अजीब लगेगा, लेकिन राहु काल में राहु की पूजा सबसे असरदार उपाय है।

राहु काल में: - नीले रंग के फूल चढ़ाएं - राहु मंत्र का जप करें:

"ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः"

  • काले तिल और सरसों का तेल चढ़ाएं

2. गोमेद रत्न — राहु का शक्तिशाली रत्न

गोमेद (Hessonite Garnet) राहु का रत्न है। सही कुंडली देखकर गोमेद पहनने से राहु की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।

विशेषकर जिन लोगों की कुंडली में राहु: - मित्र राशि में हो - शुभ भाव का स्वामी हो - महादशा चल रही हो

...उनके लिए गोमेद बहुत फायदेमंद हो सकता है।

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3. शनिवार और बुधवार को उपाय

राहु का संबंध शनि से है। इसलिए: - शनिवार को काली उड़द दान करें - बुधवार को हरी सब्जी दान करें

4. दुर्गा माता की पूजा

दुर्गा माता राहु के प्रकोप से बचाती हैं। शुक्रवार को दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

5. कालसर्प दोष की पूजा (यदि हो)

जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं, तो कालसर्प दोष बनता है। इसके लिए त्र्यंबकेश्वर (नासिक) या उज्जैन में विशेष पूजा होती है।


राहु काल और आधुनिक जीवन — व्यावहारिक सुझाव

आज के जमाने में हर काम के लिए राहु काल देखना मुश्किल है। इसलिए व्यावहारिक सुझाव:

  1. सुबह काम शुरू करने से पहले पंचांग देख लें
  2. बड़े और महत्वपूर्ण काम — जैसे नया व्यापार, बड़ी खरीदारी — इनके लिए राहु काल से बचें
  3. रोज के काम चलते रहें — सब कुछ रोकना जरूरी नहीं
  4. मोबाइल पर ऐप से आज का राहु काल देख सकते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: क्या राहु काल में खाना खा सकते हैं?

हाँ। राहु काल में रोजमर्रा के काम — खाना, सोना, पढ़ाई — सब ठीक है। सिर्फ नए और महत्वपूर्ण कामों की शुरुआत न करें।

प्रश्न 2: क्या राहु काल में डॉक्टर के पास जा सकते हैं?

आपात स्थिति में बिल्कुल जाएं। स्वास्थ्य किसी भी काल से बड़ा है।

प्रश्न 3: क्या राहु काल सभी जगह एक ही समय होता है?

नहीं। राहु काल स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है। दिल्ली और मुंबई का राहु काल अलग होगा।

प्रश्न 4: क्या ऑनलाइन राहु काल टाइम सही होता है?

अधिकांश ऐप और वेबसाइट आपके स्थान के अनुसार सही राहु काल दिखाती हैं। स्थान की अनुमति दें।

प्रश्न 5: क्या राहु काल में मंदिर जाना शुभ है?

हाँ। मंदिर जाना और पूजा करना राहु काल में भी शुभ है।

प्रश्न 6: राहु काल में गाड़ी चलाना खतरनाक है?

राहु काल में यात्रा की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन पहले से चल रही यात्रा जारी रख सकते हैं।

प्रश्न 7: क्या राहु काल में पैसे उधार लेना ठीक है?

नहीं। कर्ज लेना या देना राहु काल में अशुभ माना जाता है।

प्रश्न 8: गोमेद कब पहनना चाहिए?

राहु काल में गोमेद पहनना शुभ माना जाता है — लेकिन पहले कुंडली दिखाकर निश्चित करें कि गोमेद आपके लिए उचित है।


निष्कर्ष

राहु काल एक ज्योतिषीय तथ्य है जिसे हमारे पूर्वजों ने सदियों के अनुभव से जाना। इसे अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक सावधानी के रूप में देखें।

बड़े और महत्वपूर्ण कामों के लिए राहु काल से बचें। रोज के काम निर्भय होकर करते रहें।

और अगर कुंडली में राहु दोष हो या राहु की महादशा चल रही हो, तो हमारे ज्योतिषी से परामर्श लें:

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