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पितृ दोष — कारण, संकेत और रत्न-मंत्र उपाय

Gemshub Team 02 Jun 2026 16 views 1 min read
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पितृ दोष — कारण, संकेत और रत्न-मंत्र उपाय | Gemshub International

घर में कोई न कोई बीमार रहता है। शादियाँ अटकती हैं। संतान नहीं होती। व्यापार बार-बार डूबता है। ऐसे में ज्योतिषी कहते हैं — "पितृ दोष है।"

पितृ दोष — यह पूर्वजों की आत्माओं की अतृप्त इच्छाओं या अपूर्ण कर्मों से जुड़ा माना जाता है।


पितृ दोष के ज्योतिषीय कारण

कारण कुंडली में संकेत
नवम भाव में पाप ग्रहपिता या पितृ से सम्बंधित समस्याएं
सूर्य पीड़ितपिता का कारक कमजोर
राहु-केतु नवम मेंपूर्वजों का ऋण
शनि नवम मेंपूर्वजों के अपूर्ण कर्म

पितृ दोष के 10 संकेत

  1. घर में बार-बार अकारण बीमारी।
  2. संतान में देरी या संतान स्वास्थ्य खराब।
  3. विवाह में अड़चनें।
  4. व्यापार और नौकरी में बार-बार नुकसान।
  5. सपने में पूर्वज दिखना।
  6. घर में अशांति।
  7. पितृ पक्ष में तबीयत खराब होना।
  8. कई पीढ़ियों से एक ही समस्या।
  9. श्राद्ध न करने पर problems बढ़ना।
  10. पिता या दादा से रिश्ते कठिन।

रत्न और उपाय

माणिक (Ruby)

सूर्य पितृ का कारक है। माणिक सूर्य को बल देता है। 10 किलो = 1 रत्ती।

पुखराज (Yellow Sapphire)

नवम भाव और बृहस्पति पितृ से जुड़े हैं। पुखराज से पितृ की कृपा मिलती है।

पितृ दोष निवारण के उपाय

  • पितृ पक्ष में श्राद्ध करें — पूर्वजों को तर्पण दें।
  • गया जी तीर्थ — सबसे प्रभावी पितृ दोष निवारण।
  • मंत्र: "ॐ पितृभ्यः नमः" — 108 बार रोज।
  • प्रतिदिन पीपल के पेड़ को जल दें।
  • रविवार को सूर्य को जल चढ़ाएं।
  • ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

निष्कर्ष

पितृ दोष — इसका निवारण संभव है। श्राद्ध, तर्पण और सही रत्न से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। Ashish Jain जी से कुंडली देखाकर पितृ दोष की गहराई जानें।

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