पितृ पक्ष — पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित 16 दिन। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण अमावस्या तक।
इन दिनों में किया गया तर्पण, श्राद्ध और पूजा — पूर्वजों तक पहुँचता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। पितृ दोष का निवारण होता है।
पितृ पक्ष 2026 की तिथियाँ
पितृ पक्ष 2026 — September-October 2026। Panchang से सटीक तिथि जानें।
| तिथि | श्राद्ध | किनका |
|---|---|---|
| पूर्णिमा | पूर्णिमा श्राद्ध | पूर्णिमा को मृत |
| प्रतिपदा | प्रतिपदा श्राद्ध | प्रतिपदा को मृत |
| सर्व पितृ अमावस्या | सबसे महत्वपूर्ण | सभी पूर्वजों का |
श्राद्ध विधि
- उस तिथि को सुबह स्नान करें।
- पीले वस्त्र पहनें।
- दक्षिण दिशा में मुख करके बैठें।
- काले तिल, जौ, चावल से तर्पण करें।
- ब्राह्मण को भोजन करवाएं।
- गाय, कौवे और कुत्ते को भी भोजन दें।
पितृ दोष निवारण के रत्न
माणिक (Ruby) — सूर्य का रत्न
सूर्य पितृ का कारक है। माणिक पहनने से पितृ की कृपा मिलती है।
10 किलो = 1 रत्ती। रविवार, सोने में, अनामिका में।
पुखराज (Yellow Sapphire) — बृहस्पति
नवम भाव और बृहस्पति पितृ से जुड़े हैं। पुखराज से पितृ आशीर्वाद मिलता है।
पितृ पक्ष में विशेष उपाय
- पीपल के पेड़ को रोज जल दें — पितृ पक्ष में विशेष।
- रोज "पितृ सुक्त" का पाठ करें।
- मंत्र: "ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः" — 108 बार।
- गया, Varanasi, Nashik में पिंड दान — सबसे प्रभावी।
- पितृ पक्ष में माणिक या पुखराज खरीदना और पहनना शुभ है।
निष्कर्ष
पितृ पक्ष 2026 — पूर्वजों की आत्मा को शांति देने का अवसर। श्राद्ध, तर्पण और सही रत्न — पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। Ashish Jain जी से कुंडली देखाकर पितृ दोष की गहराई जानें।