Blog | Contact
📞 +91-9968240294
festival

निर्जला एकादशी 2026 — व्रत, महत्व और कौन सा रत्न पहनें? सम्पूर्ण गाइड

Gemshub Team 02 Jun 2026 0 views
निर्जला एकादशी 2026 — व्रत, महत्व और कौन सा रत्न पहनें? सम्पूर्ण गाइड | Gemshub International

साल में 24 एकादशियाँ आती हैं — हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। लेकिन इन सभी में एक एकादशी ऐसी है जिसे सभी 24 एकादशियों का संयुक्त फल देने वाला माना जाता है।

वो है — निर्जला एकादशी।

2026 में निर्जला एकादशी 11 जून, गुरुवार को पड़ रही है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत रखा जाता है।


निर्जला एकादशी क्या है? क्यों है यह इतनी खास?

निर्जला का अर्थ है — बिना जल के। इस व्रत में पूरे दिन और रात न खाना खाया जाता है, न पानी पिया जाता है। यह भारत के सबसे कठोर व्रतों में से एक है।

पुराणों में इसकी कहानी है — एक बार भीम ने महर्षि व्यास से कहा कि वे चारों पांडवों की तरह सभी एकादशियाँ नहीं रख सकते क्योंकि उनसे भूख सहन नहीं होती। तब व्यास जी ने कहा — "सिर्फ एक एकादशी करो — निर्जला एकादशी — और सभी 24 का फल पाओ।"

तभी से इसे भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहते हैं।


निर्जला एकादशी 2026 — तिथि और मुहूर्त

विवरण समय
एकादशी तिथि प्रारंभ 10 जून 2026, शाम 5:24 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 11 जून 2026, शाम 7:36 बजे
व्रत का दिन 11 जून 2026, गुरुवार
पारण (व्रत खोलने का समय) 12 जून 2026, सुबह 5:26 से 8:12 बजे के बीच
वार गुरुवार (बृहस्पतिवार) — अत्यंत शुभ

विशेष: 2026 में निर्जला एकादशी गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार भगवान विष्णु और बृहस्पति (Jupiter) का दिन है। यह संयोग इस एकादशी को और भी शक्तिशाली बनाता है — विशेष रूप से पुखराज धारण करने वालों के लिए।


निर्जला एकादशी का महत्व — शास्त्रों में क्या लिखा है?

स्कन्द पुराण और पद्म पुराण में निर्जला एकादशी की महिमा विस्तार से वर्णित है:

  • इस एकादशी का व्रत करने से 24 एकादशियों का सम्पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
  • मृत्यु के समय यमराज के दूतों की जगह विष्णु के दूत आते हैं।
  • इस दिन दान का फल हजार गुना अधिक होता है।
  • जल का दान इस दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
  • भक्त सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक उपवास रखते हैं।

पूजा विधि — सही तरीके से कैसे करें निर्जला एकादशी व्रत?

दसवीं रात (10 जून की रात):

  • सात्विक भोजन करें — लहसुन, प्याज, माँस वर्जित।
  • रात को जल्दी सोएं — ब्रह्म मुहूर्त में जागना होगा।

एकादशी (11 जून) — सुबह:

  • ब्रह्म मुहूर्त (4:00-5:30 बजे) में उठें।
  • स्नान करें — तिल का उबटन लगाना शुभ है।
  • पीले वस्त्र पहनें (गुरुवार + एकादशी — पीला रंग सबसे शुभ)।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो के सामने दीपक जलाएं।
  • तुलसी, पीले फूल, पंचामृत से पूजा करें।
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" — 108 बार जाप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

दिन भर:

  • पानी नहीं पीना है — यही "निर्जला" का अर्थ है।
  • जो लोग इतना कठोर व्रत नहीं रख सकते — वे फलाहार कर सकते हैं, लेकिन अन्न और जल का त्याग पूर्ण फल देता है।
  • विष्णु भजन, कीर्तन, और रामायण पाठ करें।

सायं काल (शाम):

  • आरती करें।
  • जल, अन्न, वस्त्र का दान करें — यह इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

द्वादशी (12 जून) सुबह — पारण:

  • सुबह 5:26 से 8:12 बजे के बीच व्रत खोलें।
  • पहले पानी पिएं, फिर फल, फिर अन्न।
  • इस समय के बाद पारण करना वर्जित है।

निर्जला एकादशी पर कौन सा रत्न पहनना चाहिए?

रत्न शास्त्र और ज्योतिष — दोनों मिलकर बताते हैं कि निर्जला एकादशी पर रत्न धारण करना अत्यंत फलदायी होता है। कारण — इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा रत्न की प्राकृतिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।

रत्न ग्रह किसके लिए विशेष लाभ
पुखराज (Yellow Sapphire) बृहस्पति (Jupiter) धनु, मीन राशि; सभी के लिए गुरुवार + एकादशी — दोहरा शुभ संयोग। विवाह, समृद्धि, शिक्षा में उन्नति।
मोती (Pearl) चंद्रमा (Moon) कर्क राशि मन की शांति, माँ लक्ष्मी की कृपा, व्रत में एकाग्रता।
माणिक (Ruby) सूर्य सिंह राशि आत्मबल, व्रत की शक्ति, नेतृत्व क्षमता।
पन्ना (Emerald) बुध मिथुन, कन्या राशि बुद्धि, व्यापार में सफलता, एकादशी पाठ में एकाग्रता।
नीलम (Blue Sapphire) शनि मकर, कुंभ राशि (कुंडली देखकर) शनि दोष में राहत — लेकिन ज्योतिषी से पूछकर ही धारण करें।

सबसे महत्वपूर्ण: 2026 में निर्जला एकादशी गुरुवार को है — इसलिए पुखराज धारण करने का यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। गुरुवार + एकादशी + बृहस्पति ग्रह — तीनों का संयोग बहुत दुर्लभ होता है।


रत्न धारण करने की विधि — निर्जला एकादशी पर

इस दिन रत्न धारण करने का सही तरीका:

  1. सुबह स्नान के बाद, पूजा से पहले रत्न को गंगाजल या साफ पानी में रखें।
  2. 10 मिनट तुलसी के पत्तों के साथ रखें।
  3. भगवान विष्णु के सामने रखकर "ॐ नमो नारायणाय" 21 बार बोलें।
  4. पुखराज के लिए: "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" — 108 बार।
  5. सूर्योदय के बाद सही उंगली में धारण करें।

कौन सी उंगली में पहनें:

  • पुखराज — तर्जनी (Index Finger), सोने में
  • मोती — कनिष्ठिका (Little Finger), चाँदी में
  • माणिक — अनामिका (Ring Finger), सोने में
  • पन्ना — कनिष्ठिका (Little Finger), सोने या पंचधातु में

निर्जला एकादशी पर क्या दान करें?

इस दिन दान का विशेष महत्व है। जो दान करें, वह श्रद्धा से करें:

दान फल
जल (पानी का मटका) मोक्ष का मार्ग, प्यासे को राहत — श्रेष्ठ दान
अन्न (चावल, गेहूँ) परिवार में सुख-समृद्धि
वस्त्र यश और सम्मान
छाता (गर्मी में) दुखों से रक्षा
जूते-चप्पल यात्रा में सफलता

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्र. क्या बीमार व्यक्ति निर्जला व्रत रख सकता है?
उ. नहीं। बीमार, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे — ये लोग फलाहार करके व्रत रख सकते हैं। निर्जला व्रत स्वस्थ व्यक्तियों के लिए है।

प्र. क्या इस दिन रत्न खरीदना शुभ है?
उ. हाँ — विशेष रूप से पुखराज। गुरुवार + विष्णु एकादशी का संयोग रत्न की ऊर्जा को सक्रिय करता है।

प्र. अगर गलती से पानी पी लिया तो?
उ. व्रत टूट जाता है — लेकिन विष्णु जी की क्षमा माँगें और भजन-कीर्तन जारी रखें। पुण्य आंशिक मिलता है।

प्र. क्या सभी 24 एकादशियों का फल सच में एक एकादशी से मिलता है?
उ. शास्त्रों में यही कहा गया है। आस्था और श्रद्धा के साथ किया व्रत ही फल देता है।


निष्कर्ष

निर्जला एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं — यह शरीर, मन और आत्मा की तपस्या है। 2026 में यह गुरुवार को है — पुखराज धारण करने का, नया आरंभ करने का, और विष्णु जी की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर।

अगर आप सोच रहे हैं कि कौन सा रत्न आपके लिए सही है — तो अपनी कुंडली के अनुसार ज्योतिषी से परामर्श लें। सही रत्न सही समय पर पहनना — यही रत्न शास्त्र का मूल सिद्धांत है।

Back to Blog

GEMSHUB INTERNATIONAL

सही रत्न खरीदना है?

100% Lab Certified Natural Gemstones — Direct from Source

💎 Gemstones देखें 🔮 Consultation लें

अपनी टिप्पणी लिखें

Related Articles