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नक्षत्र और रत्न

मूल नक्षत्र — केतु की जड़ें, निरृति का प्रकोप और लहसुनिया की आध्यात्मिक शक्ति

Gemshub Team 09 Jun 2026 2 views

मूल — "जड़" या "आधार।" धनु राशि के 0° से 13°20' तक। यह नक्षत्र जड़ों तक जाने का है — चाहे वो personal roots हों, family के secrets हों, या cosmic truths। देवता हैं निरृति — destruction और dissolution की देवी। नक्षत्र स्वामी है केतु। यह combination powerful spiritual seekers और deep investigators बनाता है।

मूल नक्षत्र — परिचय

विवरणजानकारी
राशिधनु 0° – 13°20'
नक्षत्र स्वामीकेतु (Ketu)
राशि स्वामीगुरु (Jupiter)
देवतानिरृति (dissolution की देवी)
प्रतीकजुड़ी हुई जड़ें
गणराक्षस गण

मूल जातकों की विशेषताएं

  • Deep researchers: सतह पर नहीं — जड़ों तक जाते हैं
  • Destructive to rebuild: पुराने को तोड़कर नया बनाना इनकी nature
  • Spiritual seekers: केतु की nature — material से परे जाना चाहते हैं
  • Intense: जो करते हैं completely करते हैं
  • Doctors और healers: निरृति का healing aspect — जहर को दवा बनाना
  • Transformative experiences: जिंदगी में कई बार complete turnaround

मूल नक्षत्र का "गंडमूल" दोष

मूल नक्षत्र को "गंडमूल" नक्षत्रों में से एक माना जाता है — यानी इसमें जन्म लेने वाले बच्चे के लिए कुछ विशेष शांति पूजा की जाती है। लेकिन यह "अशुभ" नहीं है — यह powerful है। जिन महान लोगों ने दुनिया बदली है, उनमें बहुत से मूल नक्षत्र के थे।

रत्न — लहसुनिया (Cat's Eye)

केतु नक्षत्र स्वामी — लहसुनिया primary।

  • Deep research और investigation में excellence
  • Spiritual practices में rapid progress
  • Past-life karmas को clear करना
  • Sudden negative events से protection
  • Healing abilities को strengthen करना

पुखराज — सहायक

धनु का स्वामी गुरु — पुखराज secondary। केतु + गुरु = spiritual wisdom + expansion।

एक healer का अनुभव

Rishikesh की योगिनी प्रभा (40 वर्ष, मूल नक्षत्र) — एक pranic healer और spiritual teacher। "मुझे बचपन से महसूस होता था कि लोगों की बीमारी कहाँ से आ रही है।" केतु महादशा में लहसुनिया पहनने के बाद उनकी healing powers और intensify हुईं। अब वो international workshops conduct करती हैं।

पहनने की विधि

  • दिन: मंगलवार या शनिवार
  • धातु: सोना/पंचधातु
  • अंगुली: मध्यमा
  • वजन: 5-7 रत्ती
  • मंत्र: "ॐ केतवे नमः"
  • 3 दिन trial अनिवार्य

FAQ

मूल नक्षत्र में जन्म का शांति पूजा क्यों होती है?

मूल, अश्विनी, मघा, ज्येष्ठा, रेवती, और आश्लेषा — ये 6 "गंडमूल" नक्षत्र हैं। इनमें जन्म के बाद 27 दिन में नक्षत्र शांति पूजा की जाती है। यह बच्चे के जीवन को smooth बनाने के लिए है — यह अशुभ नहीं, बस precautionary है।

Certified लहसुनिया — मूल नक्षत्र के लिए

Natural Cat's Eye — Lab Certified। Gemshub International।
WhatsApp: +91-9968240294

लहसुनिया देखें →
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