"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।"
गणेश चतुर्थी — विघ्नहर्ता गणपति का महापर्व। हर काम की शुरुआत में गणेश जी का नाम लिया जाता है।
ज्योतिष में गणपति का संबंध केतु ग्रह से है। और केतु का रत्न है लहसुनिया (Cat's Eye)।
इसके अलावा, गणेश जी राहु के प्रभाव को भी नियंत्रित करते हैं। राहु का रत्न है गोमेद (Hessonite)।
इसलिए गणेश चतुर्थी पर गोमेद और लहसुनिया का विशेष महत्व है।
गोमेद — राहु दोष से मुक्ति
गोमेद (Hessonite Garnet) राहु का रत्न है।
राहु जब कुंडली में अशुभ स्थान पर हो, तो: - जीवन में अचानक परेशानियाँ - भ्रम और भटकाव - झूठ और धोखे का शिकार होना - अनिश्चितता और डर
गणेश चतुर्थी पर — जब विघ्नहर्ता गणपति की शक्ति सर्वोच्च हो — गोमेद पहनना राहु दोष को कम करने में अत्यंत सहायक है।
लहसुनिया — केतु और गणपति की कृपा
लहसुनिया (Cat's Eye Chrysoberyl) केतु का रत्न है।
केतु आध्यात्मिकता और मोक्ष का ग्रह है। जब केतु अनुकूल हो तो व्यक्ति को: - गहरी आध्यात्मिक अनुभूति - अचानक लाभ - पुराने कर्जों से मुक्ति - रोग से मुक्ति
गणेश चतुर्थी पर लहसुनिया पहनने से गणपति और केतु दोनों की कृपा एक साथ मिलती है।
महत्वपूर्ण: गोमेद और लहसुनिया दोनों बहुत शक्तिशाली रत्न हैं। बिना कुंडली देखे नहीं पहनने चाहिए।
गणेश चतुर्थी 2026 पर क्या करें
पूजा विधि:
- सुबह स्नान करके गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें
- 21 दूर्वा (दूब घास) चढ़ाएं
- मोदक का भोग लगाएं
- गणेश मंत्र का 108 बार जप करें:
"ॐ गं गणपतये नमः"
रत्न अभिमंत्रण:
इस दिन गोमेद या लहसुनिया को गणेश जी के सामने रखकर पूजन करें। मंत्र जपते हुए रत्न को ऊर्जा से भर दें — फिर पहनें।
दान:
- हरे रंग की वस्तुएं दान करें
- गाय को हरा चारा खिलाएं
- गरीब बच्चों को मोदक बाँटें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: क्या गणेश चतुर्थी पर गोमेद पहनना शुभ है?
हाँ, अगर कुंडली में राहु अनुकूल स्थिति में हो। इस दिन गणपति की कृपा से गोमेद का प्रभाव और बढ़ जाता है।
प्रश्न 2: लहसुनिया सभी पहन सकते हैं?
नहीं। लहसुनिया बहुत तीव्र रत्न है। हमेशा कुंडली दिखाकर ज्योतिषी से पूछें।
प्रश्न 3: गणेश जी का प्रिय रत्न कौन सा है?
गणेश जी केतु से संबंधित हैं — इसलिए लहसुनिया उनका रत्न माना जाता है। हरे रंग के रत्न भी गणपति को प्रिय हैं।
प्रश्न 4: गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
2026 में गणेश चतुर्थी अगस्त में होगी — सटीक तिथि के लिए पंचांग देखें।
निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी सिर्फ मूर्ति स्थापना का पर्व नहीं — यह विघ्नों को दूर करने और जीवन में नई शुरुआत का अवसर है।
सही रत्न के साथ गणपति की पूजा करें और देखें कैसे जीवन के हर काम में बाधाएं कम होती हैं।
👉 गणेश चतुर्थी पर परामर्श → 🟤 गोमेद →
Gemshub International — 2003 से प्रमाणित रत्नों का विश्वसनीय स्रोत