Hanuman Chalisa
अर्थ, लाभ, पाठ विधि और ज्योतिषीय महत्व
हनुमान चालीसा हिंदू धर्म का एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्तोत्र है। यह केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति, मानसिक संतुलन और ग्रह बाधाओं से मुक्ति का शक्तिशाली साधन माना जाता है।
आज के समय में जब लोग तनाव, भय, असफलता, शनि-मंगल दोष और नकारात्मक ऊर्जा से परेशान रहते हैं, तब हनुमान चालीसा एक रक्षा कवच की तरह कार्य करती है।
यह लेख विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो:
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करते हैं
ज्योतिष, रत्न और रुद्राक्ष में विश्वास रखते हैं
शनि, मंगल, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से परेशान हैं
हनुमान चालीसा क्या है?
हनुमान चालीसा 40 चौपाइयों और 2 दोहों से बना एक पवित्र स्तोत्र है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी।
इसमें भगवान हनुमान के:
पराक्रम
बुद्धि
भक्ति
सेवा भाव
का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है।
“संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै”
यह पंक्ति स्वयं इसके प्रभाव को स्पष्ट कर देती है।
हनुमान चालीसा पढ़ने के प्रमुख लाभ
1. भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
हनुमान जी को बल, साहस और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
नियमित पाठ से:
डर
बुरे स्वप्न
नकारात्मक विचार
धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
2. शनि दोष और साढ़ेसाती में राहत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार:
हनुमान जी शनि देव के कष्ट को शांत करते हैं
शनि साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि महादशा में हनुमान चालीसा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है
3. मानसिक शांति और आत्मबल
जो लोग:
तनाव
घबराहट
आत्मविश्वास की कमी
से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह पाठ अत्यंत प्रभावशाली है।
4. स्वास्थ्य और ऊर्जा में वृद्धि
हनुमान जी को प्राण ऊर्जा का अधिपति माना जाता है।
हनुमान चालीसा:
शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है
आत्मबल और इच्छाशक्ति को मजबूत करती है
5. कार्यों में सफलता और बाधा निवारण
नौकरी, व्यापार, कोर्ट-कचहरी, शत्रु बाधा या किसी भी प्रकार की रुकावट में हनुमान चालीसा का नियमित पाठ लाभकारी माना गया है।
हनुमान चालीसा और ज्योतिषीय संबंध
मंगल ग्रह
हनुमान जी मंगल ग्रह से संबंधित माने जाते हैं।
मंगल दोष, क्रोध, ऊर्जा असंतुलन और साहस की कमी में हनुमान चालीसा विशेष लाभ देती है।
शनि ग्रह
शनि के कष्ट, संघर्ष और विलंब को शांत करने के लिए हनुमान चालीसा सर्वोत्तम उपायों में से एक मानी जाती है।
हनुमान चालीसा के साथ रत्न और रुद्राक्ष का संबंध
मूंगा (Red Coral)
मंगल ग्रह से संबंधित
आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा बढ़ाता है
नीलम (Blue Sapphire)
शनि ग्रह का रत्न
केवल विशेषज्ञ सलाह के बाद ही पहनें
हनुमान चालीसा के साथ इसका प्रभाव संतुलित रहता है
पंचमुखी रुद्राक्ष
मानसिक शांति
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
नियमित हनुमान चालीसा पाठ में सहायक
हनुमान चालीसा पढ़ने की सही विधि
✔️ स्नान के बाद
✔️ साफ और शांत स्थान पर
✔️ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके
✔️ दीपक या अगरबत्ती जलाकर
शुभ दिन
मंगलवार (सबसे श्रेष्ठ)
शनिवार
⏰ समय
ब्रह्म मुहूर्त
या संध्या काल
⚠️ हनुमान चालीसा पाठ में सावधानियाँ
पाठ के समय लापरवाही न करें
नकारात्मक सोच से बचें
नियमितता बनाए रखें
केवल संकट में ही नहीं, बल्कि रोज़ पढ़ें
क्या महिलाएँ हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं ?
हाँ, बिल्कुल।
हनुमान चालीसा पढ़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
यह श्रद्धा और भक्ति पर आधारित है।
पूरा हनुमान चालीसा पाठ
॥ दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥
शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन ।
तेज प्रताप महा जगवंदन ॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाए ।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डरना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
महावीर जब नाम सुनावै ॥२४
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तै हनुमान छुडावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिनके काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२
तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥
और देवता चित्त ना धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥
॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
श्री हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
जो हनुमानजी की आरती गावै।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
ऐसी स्थिति में हनुमान चालीसा केवल एक धार्मिक पाठ नहीं रहती, बल्कि यह
जीवन की बाधाओं को दूर करने वाली एक संपूर्ण आध्यात्मिक साधना बन जाती है।
जब भक्ति के साथ सही उपाय जुड़ते हैं, तो:
-
शनि, मंगल और राहु-केतु के दोष शांत होते हैं
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नकारात्मक ऊर्जा कम होती है
-
आत्मविश्वास, साहस और मानसिक शांति बढ़ती है
इसलिए किसी भी रत्न या रुद्राक्ष को धारण करने से पहले
सही जानकारी, सही सलाह और श्रद्धा—तीनों का होना अत्यंत आवश्यक है।
सही साधना + सही रत्न + सही रुद्राक्ष
= जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और सकारात्मक परिवर्तन ✨
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