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Pukhraj ratan dharan karne ke laabh

09/11/2020 0Comment
Pukhraj ratan dharan karne ke laabh, dalne ki vidhi or iska mehtavपुखराज रत्न पीले रंग का बहुत ही खूबसूरत स्टोन (STONE ) है | ये बृहस्पति ग्रह का रत्न (Ratan ) होता है | पुखराज की गुणवत्ता इसके रंग, इसके आकार, पारदर्शिता के आधार पर तय की जाती है | पुखराज (Pukhraj  OR Yellow  Sapphire ) काफी सारे रंगो में आता है | लेकिन पीले रंग का पुखराज काफी मूल्यवान रत्न है | इसकी कार्यक्षमता बहुत ही ज्यादा प्रचलित है | भारतीय ज्योतिषो की माने तो पुखराज धारण करने से खासतौर पर आर्थिक परेशानिया कम हो जाती है | यह भी कहा जाता है कि जो जातक पुखराज रत्न धारण करता है उसे आर्थिक  फायदे मिलने शुरू हो जाते है | पुखराज रत्न  के तथ्य (Facts of Pukhraj Ratan  or Yellow Sapphire Stone)पुखराज रत्न  के बारे में कहा  जाता है कि जिन व्यक्तियों  की कुंडली में बृहस्पति ग्रह  कमज़ोर होता है उनको  पीला पुखराज धारण करना चाहिए।पुखराज रत्न  के लिए राशि (Rashi For Pukhraj ratan )धनु तथा मीन राशि के जातकों के लिए पुखराज रत्न  धारण करना बहुत ही लाभकारी माना गया है।पुखराज रत्न  के फायदे (Benefits of Pukhraj Stone  in Hindi)* पुखराज रत्न धारण करने से जातक के  मान सम्मान, प्रतिष्ठा  तथा धन संपत्ति में धीरे धीरे वृद्धि होती है।* यह रत्न जातक को शिक्षा आदि के क्षेत्र में  सफलता प्रदान करवाता है।* इस पुखराज  रत्न से जातक के मन में धार्मिक तथा सामाजिक कार्य में रुचि बढ़ने  लगती है।* अगर जातक के विवाह में रुकावटे आ रही हो  तथा व्यापार में  नुकसान हो रहा हो तो इन सब  से बचने के लिए भी पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है।पुखराज रत्न के स्वास्थ्य संबंधी लाभ (Health Benefits of Pukhraj Stone)* भारतीय ज्योतिषी मानते हैं कि जिन व्यक्तियों  को सीने में  दर्द, श्वास, गला आदि समस्याओ  से परेशानी है तो उन्हें पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।* पुखराज रत्न जोड़ों के दर्द, हृदय, दस्त, टीबी, अल्सर,  गठिया, नपुंसकता तथा  घुटना   की समस्या  में भी राहत देता है |पुखराज  धारण करने  की विधि  (How to Wear Yellow Sapphire)पुखराज रत्न  गुरुवार के दिन सोने अथवा पीली धातु में जड़ कर  तर्जनी ऊँगली में  धारण  किया जाता है | धारण करते समय ये ध्यान रखना अनिवार्य है कि उस दिन  अंधेर न हो और नक्षत्र सही हो | गलत नक्षत्र में रत्न धारण करने से कभी भी सही फल प्राप्त नहीं होता है | अगर हो सके तो  धारण करने से पूर्व पीली वस्तुओं विशेषकर जो बृहस्पति से संबंधित हो उनका देना चाहिए। बृहस्पति से संबंधित कुछ वस्तुएं हैं  पीले कपड़े, केला, हल्दी  आदि। अगर आप ये सब नहीं कर सकते है तो आप बिना करे भी रत्न धारण  कर सकते है | पुखराज रत्न धारण करने  या अभिमंत्रित करने से 2  घंटे  पहले एक कटोरी में पंचामृत डाले जैसे कि दूध, घी, शहद, दही और गंगाजल | इन  सबको एक कटोरी में डाल कर उसमे पुखराज  को रख दीजिये | ये सब इतनी मात्रा में हो कि पुखराज  उसमे डूब सके | उसके बाद आप जिस भी भगवान को मानते है उनकी पूजा करके मंत्र का जाप 1100 बार करना है अगर आपके पास टाइम की समस्या नहीं है तो आप 3100 बार इस मंत्र का जाप कर सकते है | इसका  असर लगभग 30 दिन के बाद शुरू होता है और लगभग 4  वर्षो तक अपना पूरा प्रभाव देता है  और फिर धीरे धीरे इसका प्रभाव खत्म होने लगता है आप  पुनः 1  नया पुखराज लेकर धारण कर सकते है ताकि आपको लगातार शुभ फल मिलते रहे | पुखराज लेते समय यह ध्यान रखे कि उसका वजन  5  रत्ती से ऊपर हो | यह वजन आप अपने बजट के अनुसार बढ़ा सकते है | उदहारण के तोर पर अगर आप  2000 /- rs रत्ती पुखराज लेते है तो 5.25  रत्ती के 10500 /- हुए यदि आप 7  रत्ती  का पुखराज लेते है तो 14000 /- हुए | इस हिसाब से देखे तो 3500 /- rs का फर्क आ गया |  इसलिए पुखराज जब भी ले अपने बजट के हिसाब से ले | मंत्र - ॐ ब्रह्म बृह्स्पतिये नम: ।  पुखराज के  उपरत्न (Substitute of Yellow Sapphire)अगर आप पुखराज नहीं ले सकते है तो आप इसका उपरत्न डाल सकते है इसका उपरत्न पीला टोपाज, सुनेला, पीला हकीक और पीला जिरकॉन है |  लेकिन हम आपको ये सलहा जरूर  देंगे कि आप महंगा पुखराज न लेकर कोई सस्ता सा पुखराज ले ले | क्यों कि उपरत्न का पूर्ण फल कभी नहीं मिलता | उपरत्न हमेशा अपना खुद का फल देता है | आप पुखराज 500 /- rs  रत्ती वाला भी ले सकते है | ...

मूंगा रतन (Red Coral) किस किस राशि के लिए डाला जाता है ?

09/11/2020 0Comment
मूंगा स्टोन  (Moonga)आइए आज सबसे पहले जानते है  कि मूंगा कहा से आता है और इसे मंगल ग्रह (Mars) के लिए क्यों डालते है  | मूंगा स्टोन (Coral) समुन्द्र में पायी जाने वाली एक तरह की वनस्पति है जो लाल रंग (Red) की होती है इसका  रंग हल्का गाढ़ा लाल और हल्का गुलाबी हो सकता है क्यों कि ये कुदरत का दिया हुआ तोहफा है इसका रंग लाल होने की वजह से इसे मंगल ग्रह का रतन माना जाता है हमारे भारत देश में ज्योतिषी मानते है कि जिन लोगो  की कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति खराब होती है या कमजोर होती  है उनको मूंगा धारण करवा  देने से उनकी मंगल की पीड़ा शांत होती है और उसको शक्ति मिलती है | इस रतन को काफी नामो से जाना जाता है जैसे की भोम रतन, पोला, मिरजान, लता मणि, कोरल (Red coral) और परवाल के नाम से ही इसे जाना जाता है|मूंगा रतन किस किस राशि के लिए डाला जाता है ?मूंगा रतन मेष राशि (Mesh Rashi) और वृश्चिक राशि (Scorpio) के लिए डाला जाता है |मूंगा डालने के फायदे (Benefits)1. मूंगा धारण करने से जातक को किसी तरह का डर नहीं लगता है |2. मूंगा धारण करने से जातक के आत्मविश्वाश में वृद्धि होती है और सकारात्मक सोच बनती है |3. मूंगा डालने से आत्मविश्वाश बढ़ने लगता है और दूसरे लोगो को देखने का नजरिया धीरे धीरे बदलने लगता है |4. मूंगा रतन धारण करने से जातक का क्रूर होना और जलन का होना बंद हो जाता है |    (यधपि क्रूर होना और जलन का होना ये हर जातक के साथ नहीं होता है लेकिन  बहुत बार जातक क्रूर हो जाता है और  छोटी छोटी बात पर गुस्सा करने लगता है | इसलिए मूंगा डालने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष से सलाह जरूर ले | बिना सलाह लिए मूंगा न डाले |)स्वास्थ्य (Health) के लिए लाभदायक मूंगा रतन 1. मूंगा रतन धारण करने से जातक के रक्त सम्बन्धी समस्या धीरे धीरे  खतम हो जाती है |2. जिन जातको को हिर्दय से सम्बंदित बीमारी है वो लोग मूंगा रतन धारण कर सकते है |3. ज्योतिषी मानते है किजातक को मिर्गी या पीलिया रोग है तो उसे मूंगा धारण करना चाहये |कैसे पहने मूंगा !!जैसा कि हम बोलते आये है कि किसी भी रतन को धारण करने से पहले अच्छे ज्योतिष कि सलाह जरूर ले | मूंगा रतन के फायदे और नुक्सान कुंडली में स्थित ग्रहो कि दशा पर निर्भर करता है  मूंगा मंगलवार के दिन डाला जाता है | यहाँ पर एक बात ध्यान रखने योग्य है कि मूंगा डालने से पहले ये अवश्य निर्धारित कर ले कि अंधेर तो नहीं लग रहा | क्यों कि कोई भी स्टोन अंधेर में नहीं डाला जाता है लोगो को ये बात नहीं पता होती है और ज्योतिष भी उन्हें नहीं बताते है | अंधेर और चान्दन के साथ साथ किस नक्षत्र में मूंगा डलेगा |ये भी महतवपूर्ण है | सही तरीके से डाला गया रतन कभी भी नुक्सान नहीं देता है |मूंगा किस धातु (Metal) में डाला जाता है मूंगा रतन ताम्बे में या सोने में डाला जा सकता है अगर आपका सोने का बजट नहीं है या आप पहले मूंगा डालकर देखना चाहते है तो आप ताम्बे में दाल सकते है | ताम्बे या सोने में डालने से रिजल्ट में किसी तरह का कोई फर्क नहीं आता है | मूंगा चांदी में तभी धारण करे जब ज्योतिषी ने कुंडली देख कर कहा हो |मूंगे का उपरत्न (Substitute)वैसे तो मूंगे का कोई भी उपरत्न नहीं होता है | लेकिन ज्योतिष लोगो के अनुसार संग सितारा और लाल हकीक उपरत्न  माना जाता है | लेकिन सचाई ये है कि मूंगे का कोई भी उपरत्न नहीं होता है उपरत्न सिर्फ दिल कि तसली के लिए डलवाया जाता है | क्यों कि मूंगे के रंग में और उपरत्न के रंग में बोहोत फर्क होता है साथ ही इनकी  रासायनिक संरचना भी एक दम अलग होती है | मूंगा धारण करने कि विधि मूंगा को अभिमंत्रित करने से 2  घंटे  पहले एक कटोरी में पंचामृत डाले जैसे कि दूध, घी, शहद, दही और गंगाजल | इन  सबको एक कटोरी में डाल कर उसमे मूंगे को रख दीजिये | ये सब इतनी मात्रा में हो की मूंगा उसमे डूब सके | उसके बाद आप जिस भी भगवान को मानते है उनकी पूजा करके मंत्र का जाप 2100 बार करना है अगर आपके पास टाइम की समस्या नहीं है तो आप 5100 बार इस मंत्र का जाप कर सकते है |मंत्र -  ऊं अं अंगारकाय नम: ।   ...

रुद्राक्ष से लेना है भारी लाभ तो इन बातों का रखें ध्यान

09/11/2020 0Comment
शिव का प्रत्यक्ष अंशरुद्राक्ष को शिव का प्रत्यक्ष अंश माना गया है जिसकी महिमा और चमत्कारों से हम सभी भली भांति अवगत हैं। पुराणों के अनुसार ऐसा कहा गया है कि ये रुद्राक्ष शिव के आंसुओं से बने हैं। रुद्राक्ष विभिन्न तरह के होते हैं और इसी के आधार पर इनक महत्व और उपयोगिता भी भिन्न भिन्न होती है। लेकिन रुद्राक्ष धारण करने के कुछ नियम हैं जो समान हैं।रुद्राक्षआप किसी भी तरह का रुद्राक्ष क्यों ना धारण करने जा रहे हों या किसी विशेष उद्देश्य के तहत रुद्राक्ष धारण करना हो सभी के लिए कुछ नियम हैं जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इन नियमों का पालन किए बिना रुद्राक्ष का सही फल प्राप्त नहीं होता।रुद्राक्ष धारण करने के नियमसबसे पहले तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसकी जांच अत्यंत आवश्यक है। अगर रुद्राक्ष असली है ही नहीं तो इसे धारण करने का कोई लाभ आपको प्राप्त नहीं होगा। खंडित कांटों से रहित या कीड़ा लगा हुआ रुद्राक्ष कदापि धारण ना करें।रुद्राक्ष का प्रयोगअगर आपने रुद्राक्ष का प्रयोग जाप के लिए करना है तो छोटे रुद्राक्ष ही आपके लिए सही हैं लेकिन अगर रुद्राक्ष धारण करना है तो बड़े रुद्राक्ष का ही चयन करें।रुद्राक्षरुद्राक्ष के आकार की तरह उसके दानों की संख्या का भी अपना महत्व है। अगर आपको रुद्राक्ष का जाप तनाव मुक्ति के लिए करना है तो 100 दानों की माला का प्रयोग करना चाहिए। अगर आपकी मनोकामना अच्छी सेहत और स्वास्थ्य से जुड़ी है तो आपको 140 दानों की माला का प्रयोग करना चाहिए।मालाधन प्राप्ति के लिए 62 दानों की माला का प्रयोग करें और संपूर्ण मनोकामना पूर्ति के लिए 108 दानों की माला का प्रयोग करें।महत्वपूर्ण नियमरुद्राक्ष से संबंधित एक महत्वपूर्ण नियम के अनुसार आप जिस भी माला से जाप करते हैं उस माला को कदापि धारण ना करें और जिस माला को धारण करते हैं उसे कभी भी जाप के प्रयोग में ना लाएं।प्राण प्रतिष्ठारुद्राक्ष को बिना शुभ मुहूर्त के भी धारण ना करें। सर्वप्रथम उसकी प्राण प्रतिष्ठा करवाएं और उसके बाद ही रुद्राक्ष धारण करें।महत्त्वपूर्ण समयहिन्दू शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में कर्क और मकर संक्रांति के दिन अमावस्या पूर्णिमा और पूर्णा तिथि पर रुद्राक्ष धारण करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।रुद्राक्षजिन लोगों ने रुद्राक्ष धारण किया है उनके लिए मांस मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे को करना वर्जित है। इसके अलावा लहसुन और प्याज के सेवन से भी बचना चाहिए।अंगूठी में ना धारणा करेंरुद्राक्ष धारण करने से पूर्व उसे भगवान शिव के चरणों से स्पर्श करवाएं। वैसे तो शास्त्रों में विशेष स्थिति में कमर पर भी रुद्राक्ष धारण करने की बात कही गई है लेकिन सामान्यतौर पर इसे नाभि के ऊपरी हिस्सों पर ही धारण करें। रुद्राक्ष को कभी भी अंगूठी में धारण नहीं करना चाहिए ऐसा करने से इसकी पवित्रता नष्ट हो जाती है।नियमरुद्राक्ष धारण किए हुए कभी भी प्रसूति गृह श्मशान या किसी की अंतिम यात्रा में शामिल ना हों। मासिक धर्म के दौरान स्त्रियों को रुद्राक्ष उतार देना चाहिए। इसके अलावा रात को सोने से पहले भी रुद्राक्ष उतार दें।दिव्य औषधिरुद्राक्ष को दिव्य औषधि कहा गया है जो सकारात्मक ऊर्जा और प्रभावी तरंगों से बनी है। इस औषधि का पूर्ण लाभ लेने के लिए नियमित तौर पर इसकी साफ सफाई अनिवार्य है। जब कभी रुद्राक्ष शुष्क प्रतीत होने लगे तो इसे तेल में डुबोकर कुछ देर के लिए रख दें।सोने या चांदी के आभूषणमूलत: रुद्राक्ष को सोने या चांदी के आभूषण में ही धारण करें लेकिन अगर किसी कारणवश यह उपलब्ध नहीं है तो आपको ऊनी या रेशमी धागे की सहायता से रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।रुद्राक्षरुद्राक्ष धारण करने से पूर्व पूजाकर्म और जाप करना होता है, लेकिन सामान्य हालातों में इसे संभव कह पाना मुश्किल है इसलिए जब भी आपको रुद्राक्ष धारण करने का मन करे या ज्योतिष आपको सलाह दे तो सर्वप्रथम यह ध्यान रखें कि धारण करने का दिन सोमवार ही हो।धारण करने से पहलेपहनने से पहले रुद्राक्ष को कच्चे दूध, गंगा जल, से पवित्र करें और फिर केसर, धूप और सुगंधित पुष्पों से शिव पूजा करने के बाद ही इसे धारण करें। ...